पर्यटन को पहचान दिलाने में विजय शाह का रहा विशेष योगदान
सीके पारे हरदा
जिला मुख्यालय से करीब 20–25 किलोमीटर दूर रहटगांव क्षेत्र में स्थित गोराखाल जलप्रपात इन दिनों बारिश के मौसम में अपनी मनमोहक छटा बिखेर रहा है। ऊंची चट्टानों से गिरता पानी और चारों ओर फैली हरियाली बड़ी संख्या में पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। सप्ताहांत और छुट्टियों के दौरान यहां जिले सहित आसपास के क्षेत्रों से भी लोग प्रकृति का आनंद लेने पहुंच रहे हैं।
गोराखाल को पर्यटन स्थल के रूप में पहचान दिलाने में पूर्व विधायक एवं प्रदेश सरकार के मंत्री विजय शाह का विशेष योगदान माना जाता है। उनके प्रयासों से इस प्राकृतिक धरोहर को पर्यटन के नक्शे पर स्थान मिला। इसके अलावा वन विभाग ने भी यहां संरक्षण और पर्यटन सुविधाओं के विकास के लिए समय-समय पर प्रयास किए हैं। हाल ही में विजय शाह भी गोराखाल पहुंचे और यहां की प्राकृतिक सुंदरता का अवलोकन किया।
गोराखाल का इतिहास भी काफी रोचक माना जाता है। स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार अंग्रेजी शासन के दौरान यहां अंग्रेज अधिकारियों का एक रेस्ट हाउस हुआ करता था। वे शिकार के लिए इस क्षेत्र में आते और यहीं ठहरते थे। आदिवासी समुदाय अंग्रेजों को “गोरी खाल वाले” कहकर पुकारता था। मान्यता है कि इसी संबोधन से समय के साथ इस क्षेत्र का नाम गोराखाल पड़ गया।
आज गोराखाल जलप्रपात हरदा जिले के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है। बारिश के मौसम में यहां प्राकृतिक सौंदर्य अपने चरम पर होता है। हालांकि प्रशासन पर्यटकों से अपील करता है कि वे सुरक्षा नियमों का पालन करें, फिसलन वाली चट्टानों और गहरे पानी के पास जाने से बचें, ताकि इस खूबसूरत स्थल का आनंद सुरक्षित तरीके से लिया जा सके।