मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
दीवानगंज रेलवे स्टेशन के उस पार केमखेड़ी गांव के जंगल में पवन लोधी पिता मांगीलाल लोधी उम्र 38 वर्ष निवासी केमखेड़ी अपनी बकरियों को लेकर जंगल में चराने गया था गुरुवार दोपहर के समय झाड़ियां में से निकलकर तेंदुआ ने बकरियों पर हमला कर दिया। पवन लोधी ने बकरियों को बचाने की कोशिश की तो तेंदुआ ने पवन लोधी पर ही हमला कर दिया। पवन लोधी ने बामुश्किल अपनी जान बचाकर गांव की तरह भगा तब जाकर जान बच पाई। ग्रामीण इकट्ठा होकर पहुंचे तो तब तक तेंदुआ तीन बकरियां का शिकार कर चुका था।
पवन लोधी के भाई पूरन सिंह लोधी ने जानकारी देते हुए बताया कि मेरा भाई पवन सुन और बोल नहीं सकता इशारों में ही बात कर पता है। ग्रामीणों द्वारा वन विभाग को सूचना देने पर घटनास्थल पर वन कर्मचारी पहुंचे।
घायल पवन लोधी और उसके भाई पूरन सिंह लोधी को लेकर शाम के समय 4 बजे के लगभग प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र दीवानगंज पहुंचे तो वहां पर कोई डॉक्टर नहीं मिला। और ना ही किसी प्रकार का इलाज किया गया इसके पश्चात घायल को सांची सिविल अस्पताल ले जाया गया जहां पर उसका इलाज किया गया है।
कुलहड़िया पर स्थित वन कर्मचारियों ने जानकारी देते हुए बताया कि केमखेड़ी का जंगल वन विकास निगम के अंतर्गत आता है कक्ष क्रमांक 8 ,9 और 11 वन विकास निगम में चला गया है। घटना की जानकारी मिलने पर घायल का उपचार करा दिया गया है आगे की कार्रवाई वन विकास निगम करेगा।
पवन के भाई पूरन सिंह लोधी ने बताया कि इससे पहले भी तेंदुआ ने दो बार बकरियां पर हमला कर चुका है जिससे हम लोगों को आर्थिक नुकसान पहुंचा है हालांकि अभी तक हमें किसी भी प्रकार का कोई मुआवजा नहीं मिला है।
आगे बताया कि जंगल में एक तेंदुआ नहीं है बल्कि तीन तेंदुआ है जिनका मूवमेंट लगातार बना रहता है गांव वाले इन तेंदुआ से काफी परेशान है हर कभी हमारे पशुओं का शिकार करता रहता है।
बता दे की दीवानगंज ,अंबाडी ,सेमरा, कुलहड़िया, नरखेड़ा , संग्रामपुर , कयामपुर, गीदगढ़, मुस्काबाद यदि के जंगलों में तेंदुआ का मूवमेंट लगातार देखा जा रहा है इन्हीं गांव के जंगल में हमेशा तेंदुआ पालतू पशुओं का शिकार कर चुका है अभी तक दीवानगंज क्षेत्र के लगभग 30 जानवरों का शिकार तेंदुआ कर चुका है। बार-बार तेंदुआ के दिखाई देने से इन गांव में दहशत का माहौल हमेशा बना रहता है।
वन विभाग ने कुछ दिन पहले ही नरखेड़ा गांव और जंगल में तेंदुआ होने का संकेतक बोर्ड लगा रखा है और अनाउंसमेंट भी किया गया था कि रात के समय गांव वाले जंगल में न जाए। अपने पालतू पशु को घर में बांधकर रखें अगर शाम के समय जाना पड़े तो सब ग्रामीण इकट्ठा होकर बातचीत करते हुए जाए।