Let’s travel together.

“अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस”का मध्य प्रदेश के लिए विशेष महत्व है ,कब हुई बाघ दिवस मनाने की शुरूआत?

0 208

 देवेन्द्र कुमार जैन भोपाल 

अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस मनाने का निर्णय 29 जुलाई 2010 में सेंट पीटर्सबर्ग (रूस) बाघ सम्मेलन में लिया गया था। इस सम्मेलन में बाघ की आबादी वाले 13 देशों ने वादा किया था कि वर्ष 2022 तक बाघों की आबादी दोगुनी कर देंगे। मध्यप्रदेश बाघों के प्रबंधन में निरंतरता और उत्तरोत्तर सुधार करने में अग्रणी है। बाघ संरक्षण न केवल जैव विविधता के लिये महत्वपूर्ण है बल्कि यह पारिस्थितिकी के संतुलन को भी बनाये रखता है।अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस मध्यप्रदेश के लिये विशेष महत्व रखता है। बाघों के अस्तित्व और संरक्षण के परिणाम स्वरूप आज अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सबसे अधिक बाघ मध्यप्रदेश में है, यह न सिर्फ मध्यप्रदेश बल्कि भारत के लिये भी गर्व की बात है। वर्ष 2022 में हुई बाघ गणना में भारत में करीब 3682 बाघ की पुष्टि हुई, जिसमें सर्वाधिक 785 बाघ मध्यप्रदेश में होना पाये गये। बाघ रहवास वाले क्षेत्रों के सक्रिय प्रबंधन के फलस्वरूप बाघों की संख्या में भी लगातार वृद्धि हो रही है। मध्यप्रदेश के कॉरिडोर उत्तर एवं दक्षिण भारत के बाघ रिजर्व से आपस में जुड़े हुए हैं। प्रदेश में बाघों की संख्या बढ़ाने में राष्ट्रीय उद्यानों के बेहतर प्रबंधन की मुख्य भूमिका है। जंगल से लगे गांवों का विस्थापन करके बहुत बड़ा भूभाग जैविक दवाब से मुक्त कराया गया है। संरक्षित क्षेत्रों से गांव के विस्थापन के फलस्वरूप वन्य प्राणियों के रहवास क्षेत्र का विस्तार हुआ है। विगत वर्षों में अधिक चीतल की संख्या वाले क्षेत्र से कम संख्या वाले चीतल विहीन क्षेत्रों में चीतलों को स्थानांतरित किया गया है। चीतल, जो कि बाघों का मुख्य भोजन है, उनकी संख्या में वृद्धि हुई है। मध्यप्रदेश ने टाइगर राज्य का दर्जा हासिल करने के साथ ही राष्ट्रीय उद्यानों और संरक्षित क्षेत्र के प्रभावी प्रबंधन में भी देश में शीर्ष स्थान प्राप्त किया है। टाइगर रिजर्व में देशी और विदेशी पर्यटकों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। 5 वर्षों में टाइगर रिजर्व की लगभग 61 करोड़ 22 लाख रूपये की आय हुई है। बाघों के संरक्षण के लिये जीन टेस्टिंग करने की योजना है, जिससे उनकी सटीक पहचान की जा सकेगी।वन्यजीव अपराध नियंत्रण इकाई का गठन किया गया है, जो वन्यजीवों के शिकार और अवैध व्यापार को रोकने के लिए काम करती है। पुलिस और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई से शिकारियों को पकड़ने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने में मदद मिल रही है।आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, जैसे कि ड्रोन और कैमरा ट्रैप, जिससे शिकारियों की निगरानी की जा सके। इन गतिविधियों के परिणामस्वरूप मध्यप्रदेश में शिकार की घटनाओं में कमी आई है और वन्यजीवों की संख्या में वृद्धि हुई है।

Leave A Reply

Your email address will not be published.

एआई और फिनटेक की कक्षाएं हुई प्रारंभ        |     शांति और सद्भाव के साथ मनाएं नवरात्रि-दशहरा के त्योहार     |     भोपाल न्यू मार्केट में भीषण आग, कई दुकानें और रेहड़ियां चपेट में; 15 से ज्यादा दमकल मौके पर     |     बाणगंगा धाम पर 5 से 10 अक्टूबर तक श्रीमद् भक्तमाल कथा ज्ञान यज्ञ जारी     |     विश्व नेत्र दिवस पर सेवा भारती और स्वास्थ्य विभाग ने लगाया संयुक्त शिविर, 305 मरीजों की जांच, 22 ऑपरेशन के लिए चिन्हित     |     उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने जीएमसी एवं हमीदिया चिकित्सालय परिसर में निर्माणाधीन कार्यों का किया निरीक्षण     |     उपमुख्यमंत्री ने टीबी उन्मूलन के लिए JOSH (जॉइंट स्क्वॉड फ़ॉर हेल्थ) टीम का किया शुभारंभ     |     उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने श्री ताहिर अली को 73वें जन्मदिवस पर दी शुभकामनाएँ     |     उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने 11 वीं राज्य स्तरीय TNAI कांफ्रेंस-2026 का किया उद्घाटन     |     पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस में शिक्षा में AI के प्रयोग पर वाद-विवाद प्रतियोगिता     |    

Don`t copy text!
पत्रकार बंधु भारत के किसी भी क्षेत्र से जुड़ने के लिए इस नम्बर पर सम्पर्क करें- 9425036811