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युवक पर लठ बरसाने वालों पर गिरी गाज, एफआइआर होते ही सीएम ने दिए एसडीएम को हटाने के निर्देश

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उमरिया। बांधवगढ़ एसडीएम अमित सिंह की गुंडागर्दी का एक वीडियो सोमवार की शाम को वायरल होने के बाद पुलिस ने एफआइआर दर्ज कर ली है। इस बारे में जानकारी देते हुए एसपी निवेदिता नायडू ने बताया कि एफआइआर एसडीएम अमित सिंह के अलावा तहसीलदार विनोद कुमार, एसडीएम के वाहन चालक नरेन्द्र दास पनिका और तहसीलदार के सहयोगी संदीप सिंह के खिलाफ दर्ज की गई है। एफआइआर दर्ज होते ही एसडीएम अमित सिंह पद से हटाए गए।

बताया जा रहा है कि घटना के समय सभी लोगों ने मिलकर युवकों के साथ मारपीट की थी जिससे उन्हें गंभीर चोट लगी है। मारपीट करते हुए वायरल वीडियो में इसलिए सभी नजर नहीं आए हैं क्योंकि वीडियो बनाने वाले को एसडीएम अमित सिंह द्वारा धमकाकर वीडियो बनाने से रोक दिया गया था।

अस्पताल में भर्ती घायल युवक अधिकारियों की धमकी के कारण खौफ में हैं। युवकों का कहना है कि उनके साथ मारपीट करने वाले अधिकारियों ने उन्हें यह धमकी भी दी थी कि अगर उन्होंने पुलिस के सामने उनके खिलाफ अपना मुंह खोला तो वे उनके खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज करवा देंगे। इस घटना के बारे में मारपीट में घायल हुए विकास दाहिया ने बताया कि वह तो मारपीट का कोई कारण जानता नहीं है। वे तो बस एसडीएम की गाड़ी से आगे निकल गए थे जिसके बाद उनकी गाड़ी का पीछा करते हुए एसडीमए की गाड़ी वहां पहुंची और एसडीएम की गाड़ी में सवार लोग उनके साथ बर्बरता पूर्वक मारपीट करने लगे।

सोमवार की शाम वायरल हुए इस वीडियो में एसडीएम के कर्मचारी एक युवक के साथ लाठी से मारपीट कर रहे हैं। वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि एसडीएम अमित सिंह युवक को पिटता हुआ देख रहे हैं। साथ ही वीडियो में यह भी साफ दिखाई दे रहा है कि जब उनकी नजर वीडियो बनाने वाले पर पड़ी तो वे उसे भी धमकाकर रोकने का प्रयास कर रहे हैं। एसडीएम के धमकाते ही वीडियो बनना बंद भी हो जाता है। वायरल वीडियो में इतना ही कुछ है जो शर्मनाक है।

लगभग दो से तीन महीने पहले भी एसडीएम अमित सिंह ने एक वाहन चालक को इसलिए पीछा करके रोक लिया था क्योंकि वह उन्हें ओवरटेक करके निकल गया था। यह घटना भरौला गोदाम के पास की थी। एक लाल कलर की कार तेजी से कटनी की दिशा में जा रही थी जिसे एसडीएम ने रुकवा लिया था। पर इस कार में सवार व्यक्ति कोई नेता था जो एसडीएम के रूआब में नहीं आया और उल्टा एसडीएम को ही उसने उनके दायित्व याद दिलाने शुरू कर दिए। उस युवक ने जब एसडीएम ने कलेक्टर का नंबर पूछा तो एसडीएम के साथ मौजूद दूसरे लोगों ने युवक से खेद जताते हुए चले जाने के लिए कहा। कुल मिलाकर ओवरटेक करने वाले वाहनों के पीछे भागने की एसडीएम की पुरानी आदत है।

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