उदयपुरा रायसेन। निकटवर्ती ग्राम पचामा में चल रहे मानस सम्मेलन के द्वितीय दिवस पर मांगरोल धाम से पधारे हुए संत ब्रह्मचारी जी महाराज ने अपने उद्बोधन में बताया कि हम भगवान की चर्चा बहुत करते हैं, पर हम लोगों ने भगवान से दूरी बना रखी है, सब में विद्यमान परमात्मा को हम अपने में ही स्वीकार नहीं करते ,बल्कि कोई बात अगर आती है, तो हम कहते हैं की ऊपर वाला जाने, ऐसा कहीं ग्रन्थ में नहीं है, पर हमने अपनी प्रवृत्तियां के बस एवं अपनी अज्ञानता के कारण ईश्वर को बहुत दूर मान लिया है, यही हमारे कल्याण का बाधक है, और अशांति का कारक है, हमने अपने शारीरिक जीवन संबंधी नाते रिश्तेदारों को अपना माना, लेकिन भगवान से अपना कोई रिश्ता नहीं जोड़ा, नश्वर रूप धारी को अपना बना के जीते रहे, मरते रहे, हम दढ्ता से सुनिश्चित करने की हमारे में भगवान है और हम भगवान के हैं वास अवधारणा हमेशा के लिए हमारे जीवन में विद्यमान रहे इसी चिंतन मनन से हमारा जीवन का आत्म कल्याण हो जाएगा, और स्वत सुख शांति प्राप्त हो जाएगी, हमें अपनी वासना को उपासना में बदलने के लिए ईश्वर की साधना करना बहुत आवश्यक है।

जबलपुर से पधारे कृषि वैज्ञानिक डॉ बृजेश दीक्षित, भोपाल से रसाचारी विष्णु दत्त शास्त्री एवं मानस विद्यापीठ के आचार्य सुरेंद्र शास्त्री ने अयोध्या कांड के विभिन्न प्रसंगों को अपनी रोचक शैली में प्रस्तुत किया, सभी विद्वानों ने स्थानीय नित्यानंद गौशाला में पहुंचकर को दर्शन एवं, मानस की मंगल आरती कर प्रसाद ग्रहण किया, रात्रि कालीन सभा में प्रचलित नव वर्ष की पूर्व संध्या पर क्षेत्र के एवं स्थानीय साहित्यकार एवं कवियों की उपस्थिति में कविता पाठ का आयोजन हुआ, जिसमें गैरतगंज से पधारे बी पी कोश्टे एवं मुकेश पाठक, जगदीश रघु आदि ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत की,