मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
भोपाल-विदिशा स्टेट हाईवे की बालमपुर घाटी पर आए दिन हादसे हो रहे। क्योंकि यहां पर सडक़ किनारे लगी रेलिंग पूरी तरह से टूट चुकी। औपचारिकता पूरी करने के लिए एमपीआरडीसी ने टूटी हुई रेलिंग की जगह सीमेंट की बोरियां भरकर उसमें रेडियम लगवा दिए ताकि सड़क हादसों पर अंकुश लगने के साथ ही रास्ता स्पष्ट दिखाई दे सके। अब ये बोरियां भी फट गई हैं और उसमें भरी रेत बिखर चुकी। ऐसे में टूटी रेलिंग से बचना वाहन चालकों के लिए मुश्किल हो गया। रेलिंग पूरी तरह से टूटने के बावजूद एमपीआरडीसी ने दोबारा नहीं लगाई।
लोगों को कहना है कि नई रेलिंग लगाने के बजाए जिम्मेदार अफसर वैकल्पिक व्यवस्था कराने में ही जुटे रहे। रात के समय वाहन चालकों को घाटी पर अंधे मोड़ की जानकारी नहीं मिल पाती और इसी कारण र्दुघटनाएं हो जाती। गौरतलब है कि कुछ समय पूर्व बालमपुर घाटी पर लोहे की रेलिंग लगाई थी। जो आए दिन दुर्घटनाओं के कारण बार.बार टूट गई। इसके बाद कई वाहन हादसों का शिकार होकर खाई में गिर चुके।

इनका कहना है…
मेरा फूलों का व्यापार है और प्रतिदिन मैं भोपाल जाता हूं। इस दौरान हर दिन बालमपुर घाटी पर एक वाहन खड़ा हुआ दिखता है। यहां घाटी से चढ़ते और उतरते समय भय बना रहता है, कहीं दूसरा वाहन आगे या पीछे से टक्कर नहीं मार दे। इसके एक तरफ पहाड़, तो दूसरी तरफ 15 फीट गहरी खाई है।
पवन प्रजापति, व्यापारी
बालमपुर घाटी पर अंधा मोड़ होने के कारण दूर से आता वाहन नजर नहीं आता और हादसे हो जाते। वहीं इस मार्ग पर यातायात दबाव अधिक होने से वाहनों की संख्या अधिक रहती है, जबकि रोड टू-लेन बना है। बढ़ते ट्रैफिक लोड को देखते हुए फोरलेन सड़क बनाया जाना बेहद जरूरी है।
एमके साहू, ग्रामीण