इंदौर। प्रश्नपत्र लीक कांड में रेडिएंट महाविद्यालय के प्रोफेसर डा. भुवनेश पंवार की भूमिका सामने आई है। अब महाविद्यालय पर कार्रवाई तय मानी जा रही है, क्योंकि प्रबंधन ने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (डीएवीवी) को परीक्षा शुरू होने से पहले सीलबंद लिफाफा खुलने की कोई सूचना नहीं दी।
प्रोफेसर की करतूत को छिपाने में महाविद्यालय को विश्वविद्यालय प्रशासन दोषी मान रहा है। पुलिस की तरफ से जानकारी मिलने का देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंतजार कर रहा है। उसके बाद महाविद्यालय को नोटिस दिया जाएगा। उधर, स्नातक द्वितीय वर्ष की परीक्षाओं को लेकर महाविद्यालय को जिम्मेदारी नहीं सौंपी है। साथ ही आगामी किसी भी परीक्षा के लिए महाविद्यालय को केंद्र नहीं बनाने पर सहमति बनी है।
बीकाम का पर्चा हुआ था आउट
स्नातक प्रथम वर्ष की परीक्षा के दौरान बीकाम का प्रश्नपत्र आउट हुआ था। 12 घंटे पहले ही विद्यार्थियों के पास इंटरनेट मीडिया के माध्यम से प्रश्नपत्र पहुंच गया। विश्वविद्यालय की शिकायत के बाद पुलिस ने जांच की तो पाया कि निजी महाविद्यालय के प्रोफेसर ने प्रश्नपत्र आउट किया था। अब विश्वविद्यालय प्रशासन पुलिस से जानकारी मिलने का इंतजार कर रही है। मगर उससे पहले ही कुलपति डा. रेणु जैन ने उप कुलसचिव रचना ठाकुर, सहायक कुलसचिव डा. विष्णु मिश्रा सहित अन्य अधिकारियों से चर्चा की। उसमें महाविद्यालय को नोटिस देकर प्रोफेसर को हटाने को लेकर निर्देश देंगे। साथ ही केंद्र की सूची से महाविद्यालय को हटा दिया है।
नोटिस का जवाब आने के बाद होगी कार्रवाई
उपकुलसचिव रचना ठाकुर का कहना है कि महाविद्यालय ने प्रश्नपत्र को थाने से लाने और जमा करने के लिए शिक्षक की ड्यूटी लगाई थी। महाविद्यालय की दूसरी गलती यह है कि प्रश्नपत्र का लिफाफा खुलने के बारे में भी नहीं बताया। कुलपति ने महाविद्यालय को नोटिस देने के निर्देश दिए हैं। उनका जवाब मिलने पर महाविद्यालय पर दंड लगाया जाएगा।
संवेदनशील महाविद्यालय नहीं बनेंगे केंद्र
विश्वविद्यालय की बैठक में यह फैसला लिया है कि संवेदनशील महाविद्यालयों को केंद्र नहीं बनाएंगे। साथ ही केंद्रों से अब परीक्षा की ड्यूटी संभाल रहे शिक्षकों की जानकारी भिजवाना होगी। वहीं वाट्सएप ग्रुप के माध्यम से केंद्रों से सीसीटीवी के सामने प्रश्नपत्र के लिफाफे खोलने की रिकार्डिंग भेजना होगी।
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