इंदौर में कवि कुल की सेलिब्रेटी से मुलाकात और उनकी सहजता और सरलता देख अभिभूत हुए प्रोफेसर पलोड
रिपोर्ट धीरज जॉनसन
निःसन्देह शैलेशजी लोढा इंसान ही नहीं इंसान के रूप में फरिश्ते हैं,कोई उनसे सीखे किस तरह से निभाये जाते आपसी आत्मिक रिश्ते हैं।
इंदौर से प्रोफेसर श्याम सुंदर पलोड (कवि,लेखक एवं वक्ता,प्राचार्य संस्कार कॉलेज,इंदौर) शैलेश लोढ़ा के सहज और सरल स्वभाव का जिक्र करते हुए बताते है कि
उनके निजी सहायक का फोन आता है आदरणीय भाई साहब आपसे 3:30 बजे होटल रेडिसन में मिलेंगे,सूचना की अल्प अवधि के बावजूद मुझे नहीं पता था कि मेरी पत्नी और पुत्र के चेहरे इतने जोरदार खिलेंगे,बस मैं पत्नी डॉ गायत्री पलोड (प्रोफेसर) व पुत्र मौलिक के साथ पहुँच गया कवि कुल की दुनिया की सबसे बड़ी सेलिब्रिटी से मिलने होटल, ‘ आइये पलोड जी कैसे हैं आप’ ये संवाद शैलेशजी के मुख से सुनते ही परिवार समझ गया इतनी बड़ी हस्ती वास्तव में कितनी है सरल कुछ सार्थक चर्चाओं के साथ पुत्र से अलग से बात करने का उन्होंने ही प्रस्ताव रखा,फिर क्या था ढेर सारी बातचीत के बाद उनके कहने पर मौलिक पलोड़ उनको कविता सुनाते हुए दिखा,इसके वीडियो भेजिएगा पलोड जी ये कहकर उन्होंने पुत्र में नई उम्मीद जगा दी। नवपीढ़ी को आगे बढ़ाने के उनके इरादों ने ढेर प्रतिभाओं की फसल उगा दी,फिर स्वाभाविक वृत्ति के अनुसार देश के सबसे बड़े चलचित कलाकार के साथ चित्र खिंचाने की इच्छा पूरी हुई,उनसे आग्रह किया फ़ोटो के लिए और उनकी तत्काल मंजूरी हुई,उनसे व्यक्तिगत भेंट करके जो भी बाहर आता था जुबान से एक ही बात दोहराता था,इतने बेहतरीन , सरल,सहज इंसान है शैलेशजी, उनकी तारीफों का बखान कर जाता था,मनुष्य जीवन में गुण हो तो ऐसे ही होना चाहिए,प्रशंसकों के सीने में भी शैलेशजी की तरह प्रेम के बीज बोना चाहिए,वाकई उनसे मिलने के बाद सकारात्मक ऊर्जाओं की समृद्ध शक्ति मिल जाती है,प्रसन्नता के साथ साथ उनके व्यवहार को समर्पित भक्ति मिल जाती है।मैं विश्व की काव्यकुल की सबसे बड़ी हस्ती शैलेशजी लोढा को प्रणाम करता हूँ.अपने दिल के उदगार आदर सहित उन्हीं के नाम करता हूँ ।