आलेख
अरुण पटेल
जैसे-जैसे कुछ राज्यों सहित लोकसभा चुनावों के लिए एक-एक दिन कम होता जा रहा है वैसे-वैसे विपक्ष शासित राज्यों और विपक्षी नेताओं पर सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की घेराबंदी, सर्च और छापेमारी तेज होती जा रही है। विपक्षी दलों को एक अवसर मिला है कि वह अब एक प्लेटफार्म पर एकजुट हो जायें। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी एक बार फिर लोकसभा चुनाव के पहले बीजेपी विरोधी पार्टियों को एकजुट करने का अभियान छेड़ने वाली हैं और इस माह के अन्त में वह नई दिल्ली कूच करेंगी। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि केन्द्र की भाजपा सरकार द्वारा केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है।
आम आदमी पार्टी की पहल पर दिल्ली में इस मार्च के अन्त तक बैठक का आयोजन होने जा रहा है जिसमें भाजपा विरोधी विपक्षी दलों के मुख्यमंत्री शामिल होने वाले हैं, इसमें ममता बनर्जी भी शामिल हो सकती हैं। हालांकि ममता के बारे में निश्चित तौर पर तब तक कुछ नहीं कहा जा सकता जब तक कि वे बैठक में न पहुंच जायें, क्योंकि उनका जो स्वभाव और राजनीतिक शैली रही है उसको देखते हुए उनके अगले कदम के बारे में अंदाजा लगाना आसान नहीं है, लेकिन सूत्रों की मानें तो वह इस बैठक में भाग लेंगी।
ममता बनर्जी अपने दिल्ली प्रवास के दौरान विपक्ष को एकजुट करने की कोशिश करेंगी। इसमें देखने वाली बात यही होगी कि वह कांग्रेस से अपनी दूरियां घटाती हैं या गैर कांग्रेसी और गैर भाजपाई तीसरा विकल्प बनाने की दिशा में पहल कदमी करेंगी। हालांकि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी सुप्रीमो शरद पवार, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, तामिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तथा उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव यह कह चुके हैं कि कांग्रेस के बिना कोई मजबूत विकल्प तैयार नहीं हो सकता है। आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव और बसपा सुप्रीमो मायावती एवं तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर अभी भी कांग्रेस से परहेज कर रहे हैं, हालांकि उनकी बेटी कविता जबसे ईडी के घेरे में आई हैं उनका रुख कांग्रेस की ओर कुछ लचीला नजर आ रहा है।
आम आदमी पार्टी के दो मंत्रियों मनीष सिसोदिया और सत्येन्द्र जैन के जेल जाने के बाद अब आम आदमी पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल बदली हुई परिस्थितियों में कांग्रेस से दूरियां बनाकर चलते हैं या नजदीक आते हैं इस पर भी विपक्षी एकता काफी कुछ टिकी रहेगी। ममता बनर्जी के करीबी सूत्रों के अनुसार बैठक में शामिल होने के लिए ही वह तीन दिन के लिए दिल्ली दौरे पर जा सकती हैं। बैठक में आम आदमी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी सहित नौ दलों के शामिल होने की उम्मीद है। उल्लेखनीय है कि हाल ही में नौ विपक्षी नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर केंद्रीय जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया था। जिन नेताओं ने पत्र पर हस्ताक्षर किए थे उनमें पश्चिमी बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल, तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव, राजद नेता व बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, राकांपा प्रमुख शरद पवार, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, जेकेएनसी नेता फारुख अब्दुल्ला और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान शामिल थे। इन नेताओं ने मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी का विरोध करने के अलावा यह भी आरोप लगाया था कि केंद्रीय जांच एजेंसियों ने भाजपा में शामिल होने के बाद पश्चिमी बंगाल विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता शुभेन्दु अधिकारी और असम के हेमंत बिस्वा सरमा जैसे नेताओं के खिलाफ जांच बंद कर दी है वहीं हाल ही में मनीष सिसोदिया को तो जेल भेज दिया गया तथा बिहार में लालू यादव और वहां के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के यहां ईडी ने छापेमारी की है। कोलकाता में भी ममता बनर्जी के नजदीकी नेताओं को भी हाल ही में गिरफ्तार किया गया जबकि उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी जांच एजेंसियों के राडार पर हैं। इस बैठक की समाप्ति पर ही यह पता चल सकेगा कि कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री केवल अपने आपको भाजपा विरोध तक ही सीमित रखते हैं या विपक्षी एकता में शामिल होने की पेशकश करते हैं। अभी यह भी स्पष्ट नहीं है कि आम आदमी पार्टी ने उन्हें बुलाया भी है या नहीं।

–लेखक सुबह सवेरे के प्रबंध संपादक हैं
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