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उत्तरप्रदेश में पहले चरण का मतदान शुरू,भाजपा के 09 मंत्री चुनाव मैदान में

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सुरक्षा के लिए केंद्रीय बलों की 796 कंपनियां तैनात

पहले चरण में 623 उम्मीदवार चुनाव मैदान में, भाजपा के 09 मंत्री मैदान मे

पहले चरण में योगी सरकार के 9 मंत्री मैदान में हैं. सुरेश राणा, श्रीकांत शर्मा, संदीप सिंह, अतुल गर्ग , अनिल शर्मा, कपिल देव अग्रवाल , दिनेश खटीक, डॉ जीएस धर्मेश , लक्ष्मी नारायण चुनाव मैदान में हैं।

उत्तर प्रदेश की 11 जिलों की 58 सीटों पर वोटिंग शुरू हो गई है. पहले चरण में 623 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला होगा. इस बार वोटिंग सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक चलेगी. कोरोना के चलते चुनाव आयोग ने मतदान को एक घंटे बढ़ाने का फैसला किया है. 58 सीटों में से 12 सीटें संवेदनशील हैं. ये सीटें खैरागढ़, फतेहाबाद, आगरा दक्षिण, बाह, छाता, मथुरा, सरधना, मेरठ शहर, छपरौली, बड़ौत, बागपत और कैराना हैं. पहले चरण में  898 मोहल्ले और 5535 पोलिंग सेंटर संवेदनशील रखे गए हैं.

पहले चरण में केंद्रीय सुरक्षा बलों की 796 कंपनियां तैनात की गई हैं. इनमें से 724 कंपनियां बूथ ड्यूटी पर. 15 कंपनियां स्ट्रॉन्ग रूम सिक्योरिटी पर और 5 कंपनियां ईवीएम सिक्योरिटी पर, जबकि 66 कंपनियां लॉ एंड ऑर्डर ड्यूटी पर तैनात हैं. इसके अलावा यूपी पुलिस की ओर से PAC की 27 कंपनियां पहले चरण में तैनात की गई हैं. पुलिस के 9464 इंस्पेक्टर और एसआई रैंक अधिकारी, 59030 कॉन्स्टेबल, 48,136 होमगार्ड , 505 पीआरडी जवान और 6061 गांवों के चौकीदार को पहले चरण की चुनाव ड्यूटी में लगाया गया है.

पहले चरण में 58 सीटों पर 623 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं. एडीआर ने इनमें से 615 उम्मीदवारों के हलफनामों का एनालिसिस किया है. इनमें से 25% यानी 156 पर आपराधिक मामले दर्ज हैं. इनमें से 20% उम्मीदवारों यानी 121 पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं.

पहले चरण में सपा के सबसे ज्यादा 28 उम्मीदवारों में से 21पर आपराधिक मामले दर्ज हैं. इसके बाद दूसरा नंबर आरएलडी का आता है. आरएलडी ने 57 उम्मीदवारों में से 29 यानी  दागियों को टिकट दिया है. इसके अलावा बीजेपी के  58 उम्मीदवारों में से  21 उम्मीदवार दागी हैं. वहीं, बसपा के 56 में से 19 और आम आदमी पार्टी के  52 में से 8 उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं।
पहले चरण में जिन विधानसभा सीटों पर चुनाव होने हैं वो कभी बसपा, फिर सपा का गढ़ रही हैं. लेकिन पिछले चुनाव में  इन सीटों पर भाजपा का कब्जा हो गया।लेकिन इस बार पहले चरण के चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा राष्ट्रीय लोक दल प्रमुख और चौधरी चरण सिंह के उत्तराधिकारी जयंत चौधरी की है. आरएलडी का हमेशा से जाट वोटरों पर प्रभाव रहा है. मुस्लिम जाट कॉम्बिनेशन की चर्चा पूरे पश्चिमी यूपी में रही है. मुजफ्फरनगर दंगों के बाद 2017 चुनाव में जाट वोट बीजेपी की झोली में आ गया था. लेकिन अब बदले सियासी समीकरण में जयंत चौधरी का प्रभाव नजर आ रहा है।

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