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स्कूल जाने की उम्र में बच्चे थैला लेकर पन्नी बीनने और बाल मजदूरी का कर रहे काम

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मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन

पढ़ेगा इंडिया तो बढ़ेगा इंडिया का नारा उस तस्वीर के आगे फीका पड़ता दिखाई देता है, जिसमें स्कूल जाने की उम्र में बच्चे थैला लेकर पन्नी बीनने और बाल मजदूरी करते दिखाई देते हैं। अब इसे हमारे सिस्टम की उदासीनता कहें या बाल संरक्षण के प्रति लापरवाही। आज भी शिक्षा के लिए करोड़ों रुपए की योजनाएं बनती हैं, मगर जमीनी स्तर पर आकर दम तोड़ देती हैं।बेरखेड़ी चौराहा , फैक्ट्रीचौराहा दीवानगंजऔर दीवानगंज क्षेत्र में घुमक्कड़ जाति वर्ग के लोग रहते हैं। सुबह जिस समय दूसरे घरों के बच्चे स्कूल के लिए हाथ में बस्ता लेकर निकलते हैं। इस मोहल्ले के बच्चे हाथ में थैला लेकर कचरा बीनने, या बाल मजदूरी करने जाते हैं। दीवानगंज मैं घुमक्कड़ समाज के लगभग 30 से 35 बच्चे शिक्षा से वंचित है। अभी पिछले वर्ष ही राष्ट्रीय बाल एवं संरक्षण अधिकार आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने सलामतपुर के पास धपसटनगर, राजीव नगर पहुंचकर भोपा जाति के लोगों से भेंट कर तथा बच्चों को मिल रही सुविधाओं का जायजा भी लिया था।कानूनगो ने अधिकारियों से भोपा समाज को मुख्य धारा से जोड़ने के लिए शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए कहा था। उन्हें मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए कहा था। उनके बच्चों को स्कूल में दाखिल कराने के निर्देश दिए थे। छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं का लाभ देने के लिए इनकी जाति का निर्धारण करने के लिए जरूरी कार्रवाई के निर्देश भी दिए थे। क्षेत्र में रह रहे सेहरिया, बछड़ा, सपेरा, गुसाई सहित आदिवासी समाज के लोगों को भी शासकीय योजनाओं से लाभान्वित करने के संबंध में निर्देश दिए थे। दीवानगंजऔर बेरखेड़ी चौराहा पर ऐसे बच्चे आसानी के साथ मिले जाएंगे, जो कचरा बीनने का कार्य करते हैं। इन सभी बच्चों का स्ट्रीट चिल्ड्रन के अंतर्गत सर्वे कराया जाना चाहिए। कुछ समय चाइल्ड लाइन ने भी सर्वे किया था। मगर स्थिति वैसी की वैसी ही है। शासन इन बच्चों को स्कूल भेजने सहित परिजनों को अन्य कार्यों में लगाए।
इनका कहना है –

शासन प्रशासन की तरफ से कचरा बीनने वाले बच्चों के लिए कोई भी ऐसा प्रयास नहीं किया जा रहा है कि उनको बाल मजदूरी के साथ ही पन्नी, कबाड़ा ना बिनना पड़ेे। दीवानगंज क्षेत्र में ऐसे कई बच्चे घूमते दिखाई देते हैं।
– –पवन प्रजापति
ऐसे परिवारों के लिए शिक्षा के प्रति जागरुक करना आवश्यक है। इनको समझाना पड़ेगा कि बच्चों को पढ़ाना कितना आवश्यक है, यहां के बच्चे सुबह 6 बजे से ही फैक्ट्री चौराहा दीवानगंज के आसपास पन्नी बिनते हुए नजर आते हैं।

मुकेश साहू

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