उदयपुरा रायसेन। ग्राम पचामा में चल रहे सप्त दिवसीय श्री रामचरित मानस सम्मेलन के 56 में वार्षिक उत्सव कार्यक्रम मैं मुख्य कथा व्यास स्वामी नित्यानंद गिरी महाराज ने कहा की रामचरितमानस में किष्किंधा कांड सबसे विशेष है , मित्र कैसे हो और मित्रता कैसे निभाई जाए यह सभी उदाहरण किष्किंधा कांड में मिलते हैं , स्वामी जी ने कहा की हनुमान जी संत है, और सुग्रीव विषय है , भोगांव की इच्छा रखने वाला है , परंतु हनुमान जी जैसा मित्र उसके साथ होने से उसे भगवान श्रीराम का संग प्राप्त होता है, स्वामी जी ने विषय भोगी जीव की परिभाषा बताते हुए कहा कि भोगी हमेशा भयभीत एवं शंकालु होता है , सुग्रीव भी ऐसा ही है इसलिए बह श्री राम की वीरता पर शंका करता है । स्वामी जी ने कहा कि प्रभु राम ने अपनी मित्रता निभाते हुए, बाली को मारकर सुग्रीव को राज सिंहासन पर बैठाया, मित्रता कैसे निभाई जाती है यह हमें किष्किंधा कांड में सीखने को मिलता है । इसलिए जीवन में एक अच्छे मित्र का होना बहुत जरूरी है, कार्यक्रम में मंच संचालक सुरेंद्र कुमार शास्त्री नेवी किष्किंधा कांड के सुंदर प्रसंगों पर अपने विचार प्रकट किए ।