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RTI जानकारी देने में क्यों हाथपैर फूल जाते हैं अधिकारियों के ,भ्रष्टाचार नहीं किया तो क्यों परेशान हैं श्रीमान!

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विनोद साहू बाड़ी रायसेन

पूर्व काँग्रेस की मनमोहन सिंह की सरकार ने विभागों में हो रहे भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए लोक सूचना अधिकार अधिनियम 2005 में कानून बनाया और आम खास के अलावा गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने बालों को भी इस कानून के इस्तेमाल करने के लिए निशुल्क जानकारी देने का रास्ता साफ किया जिससे आपको लगता हैं कि यहाँ पर भ्रष्टाचार हुआँ , बह लोक सूचना अधिकार अधिनियम 2005 की धारा के तहत दस रुपये का स्टाँप शुल्क या गरीबी रेखा राशनकार्ड लगाकर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं,लेकिन अधिकारियों ने इस नियम का पालन करने की बजाय जानकारी लेने बालों को इतना परेशान कर देते हैं कि बह फिर भूलकर भी कहीं भी सूचना अधिकार लगाने लायक नहीं रहते ।
चार पेज की जानकारी देने में छूट रहा पसीना
मध्यप्रदेश में इस बार पंचायती चुनावों में आरक्षण सहित कई पेंच फंसने से चुनाव टल गया और नगर परिषद में प्रशानिक हाथों में आ गया और प्रशासन की किस्मत से कोरोना महामारी आ गई इसमें प्रशासनिक अमले ने जमकर भ्रष्टाचार किया,जिसमें नगर पंचायत परिषद ने एक ट्रैक्टर क्रमाँक MP38AC7768 को 02.12.2021को खरीदा गया लेकिन नगर में धुंधली चर्चाओं का दौर शुरु हुआँ कि प्रशासन ने महेन्द्रा 585 शोरूम कीमत से अधिकतम उच्य कीमत पर खरीदकर उस राशि का बंदरबांट किया ।
अर्चना जैन ने लगाई आरटीआई
इस खरीदे में प्रमाणित भ्रष्टाचार की परतों को खोलने के लिए अर्चना जैन ने लोक सूचना अधिकार अधिनियम के तहत कुछ जानकारी हासिल करने के उद्देश्य से आरटीआई नगर परिषद में लगाई लेकिन किसी भी जानकारी को देने में नगर परिषद में नियुक्त लोक सूचना अधिकारी ने उसे रद्दी की टोकरी में फेंक दिया । अर्चना जैन जब नगर परिषद आँफिस पहुँचकर जानकारी चाही तो सीएमओ हरिशंकर वर्मा ने कहा कि हम ढाई साल से परेशान हैं , तो बह वापिस लौट आई और भोपाल कमीश्नर के आँफिस में लिखित शिकायत की और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की बात कहीं इस पर कमीश्नर ने पूर्ण आश्वासन दिया कि हम जाँच करायेंगे और दोषी को गुनाह के हिसाब से सजा भी दिलवायेंगे।
बाजार में उस समय ट्रैक्टर की कीमत छह लाख साठ हजार
नगर परिषद ने जब ट्रैक्टर क्रय किया उस समय महेन्द्रा ट्रैक्टर की कीमत छह लाख साठ हजार रुपए थी और शहर उसी समय चार ट्रैक्टर किसानों ने उठाये थे लेकिन नगर परिषद ने बहीं ट्रैक्टर सात लाख छयासठ हजार कुछ रुपये में खरीदा जो भ्रष्टाचार की परिधि पार करता हैं । इसी तरह लगभग दो करोड़ से अधिक की अनावश्यक खरीदी नगर परिषद ने की जिसमें एक ही व्यक्ति अन्य नामों से कोटेशन बनवाता हैं और सामान बेंचता हैं ..अगर इस खरीदी और कबाड़ा बिक्रय की गहनता से जाँच हो जाए तो वर्तमान के साथ ही सेवानिवृत्त कर्मचारी भी पुलिस के मेहमान नजर आयेंगे

 

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