तीन महीने बाद भी जारी नहीं हुए पदस्थापना आदेश, हजारों पद खाली होने के बावजूद प्रभारी प्राचार्यों के भरोसे चल रहे सरकारी स्कूल
सी के पारे भोपाल
मध्यप्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग में पदोन्नति प्रक्रिया के बाद भी शिक्षकों को उसका वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा है। व्याख्याताओं को प्राचार्य पद पर पदोन्नति दिए जाने के करीब तीन महीने बाद भी कई शिक्षकों के पदस्थापना आदेश जारी नहीं हुए हैं। ऐसे में पदोन्नति पाने वाले शिक्षक नई जिम्मेदारी संभालने के इंतजार में हैं। सबसे चिंताजनक स्थिति उन शिक्षकों की है, जो सेवानिवृत्ति की दहलीज पर खड़े हैं। यदि समय रहते पदस्थापना आदेश जारी नहीं हुए तो कई शिक्षक प्राचार्य बनने का सपना पूरा किए बिना ही सेवानिवृत्त हो सकते हैं।
हैरानी की बात यह है कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों में प्राचार्यों के हजारों पद रिक्त बताए जा रहे हैं, इसके बावजूद नियमित प्राचार्यों की नियुक्ति के बजाय कई स्कूलों में प्रभारी व्यवस्था के सहारे काम चलाया जा रहा है। इसका असर स्कूलों के प्रशासनिक संचालन से लेकर शैक्षणिक गतिविधियों तक दिखाई दे रहा है।
भोपाल के कई स्कूलों में नियमित प्राचार्य नहीं
राजधानी भोपाल के भी कई शासकीय स्कूल नियमित प्राचार्य के बिना संचालित हो रहे हैं। इनमें शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कन्या हमीदिया, क्रमांक-2 कन्या स्कूल, सुल्तानिया, मॉडल स्कूल शाहजहानाबाद और अरेरा कॉलोनी स्कूल सहित कई संस्थान शामिल हैं। नियमित प्राचार्य नहीं होने से स्कूलों की प्रशासनिक जिम्मेदारियां अन्य शिक्षकों को संभालनी पड़ रही हैं। इससे शिक्षकों की निगरानी, विभागीय कामकाज और शैक्षणिक गतिविधियों के संचालन में भी चुनौतियां सामने आ रही हैं।
अगले महीने रिटायर होंगी रेखा अग्रवाल, फिर भी आदेश नहीं
पदस्थापना में देरी का सबसे बड़ा खामियाजा उन शिक्षकों को भुगतना पड़ रहा है, जिनकी सेवानिवृत्ति नजदीक है। सेमरा कला शासकीय स्कूल की व्याख्याता रेखा अग्रवाल अगले महीने सेवानिवृत्त होने वाली हैं। उनका नाम भी पदोन्नति सूची में शामिल है, लेकिन अब तक उन्हें पदस्थापना आदेश नहीं मिला है।
इसी तरह व्याख्याता मंजू जैन पिछले महीने सेवानिवृत्त हो चुकी हैं। बताया जा रहा है कि उनका नाम भी पदोन्नति सूची में शामिल था। वहीं शासकीय उच्चतर माध्यमिक कन्या विद्यालय की व्याख्याता लता शर्मा करीब छह महीने बाद सेवानिवृत्त होने वाली हैं। उन्हें भी प्राचार्य पद पर पदस्थापना का इंतजार है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब पदोन्नति की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है तो पदस्थापना आदेश जारी करने में इतनी देरी क्यों की जा रही है? कहीं ऐसा न हो कि कई शिक्षक पदोन्नति मिलने के बावजूद प्राचार्य के रूप में कार्यभार संभालने का अवसर पाए बिना ही सेवानिवृत्त हो जाएं।
शिक्षक संगठन ने विभाग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
शिक्षक संगठन मध्यप्रदेश के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने पदस्थापना में हो रही देरी पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि प्रदेश में प्राचार्यों के हजारों पद रिक्त हैं और व्याख्याताओं को पदोन्नति भी दी जा चुकी है, इसके बावजूद पदस्थापना आदेश जारी नहीं किए जा रहे हैं। इससे सेवानिवृत्ति के करीब पहुंचे शिक्षकों को पदोन्नति का वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा है।
उन्होंने विभाग से मांग की है कि बिना अनावश्यक देरी के पदोन्नत शिक्षकों को पदस्थापना दी जाए, ताकि उन्हें अपने सेवाकाल में प्राचार्य के रूप में कार्य करने का अवसर मिल सके और स्कूलों में भी नियमित प्राचार्यों की व्यवस्था हो सके।
विभाग का दावा, जल्द पूरी होगी पदस्थापना प्रक्रिया
मामले में आयुक्त लोक शिक्षण अभिषेक सिंह का कहना है कि प्राचार्य पद पर पदोन्नति के बाद पदस्थापना की प्रक्रिया जारी है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद सभी स्कूलों में नियमित प्राचार्य उपलब्ध हो जाएंगे।
पद खाली तो पदस्थापना में देरी क्यों?
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब सरकारी स्कूलों में प्राचार्यों के हजारों पद रिक्त हैं और पदोन्नति प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है, तो पदस्थापना आदेश जारी करने में विभाग को इतना समय क्यों लग रहा है? एक ओर स्कूल नियमित प्राचार्यों की कमी से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पदोन्नत शिक्षक आदेश की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अब देखना होगा कि विभाग की यह प्रक्रिया कब पूरी होती है और सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच चुके शिक्षकों को प्राचार्य बनने का अवसर मिल पाता है या नहीं।