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मध्यप्रदेश संयुक्त किसान मोर्चा ने मुख्यमंत्री को सौंपा 26 सूत्रीय मांगपत्र; किसानों की समस्याओं पर तत्काल कार्रवाई की मांग

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सातों प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं पर रोक, फसल क्षति का मुआवजा, सभी प्रमुख फसलों की MSP पर खरीदी

कर्जमाफी और भूमि अधिग्रहण से प्रभावित किसानों को मुआवजा, पुनर्वास एवं रोजगार देने की मांग

भोपाल।मध्यप्रदेश संयुक्त किसान मोर्चा (MPSKM) ने प्रदेश के किसानों की ज्वलंत समस्याओं के समाधान के लिए 26 सूत्रीय मांगपत्र 13 अक्टूबर को मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश सरकार के नाम मध्यप्रदेश शासन के वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपा। मांगपत्र मुख्यमंत्री के सचिव अरविंद दुबे, मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल तथा कृषि उत्पादन आयुक्त एवं अपर मुख्य सचिव के. सी. गुप्ता को सौंपकर किसानों की समस्याओं पर तत्काल एवं समयबद्ध कार्रवाई की मांग की गई।

मध्यप्रदेश संयुक्त किसान मोर्चा विभिन्न विचारधाराओं से जुड़े, दलगत राजनीति से पृथक किसान संगठनों का साझा मंच है। मोर्चे ने प्रदेश में बढ़ती कृषि लागत, खाद की किल्लत, फसलों को प्राकृतिक आपदाओं से हो रहे नुकसान, कृषि उपज का लाभकारी मूल्य नहीं मिलने, सरकारी खरीदी की अव्यवस्थाओं, बिजली बिलों में अनियमितताओं, किसानों पर बढ़ते कर्ज और भूमि अधिग्रहण से उत्पन्न संकट को गंभीर बताते हुए सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की है।

मोर्चे ने मांग की है कि अतिवृष्टि एवं अन्य प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित फसलों का पारदर्शी सर्वे कराकर किसानों को तत्काल मुआवजा दिया जाए। धान, गेहूँ, मक्का, सोयाबीन, मूंग, उड़द, अरहर, ज्वार, बाजरा, कोदो, कुटकी और कपास सहित सभी पात्र फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी सुनिश्चित की जाए। सरकारी खरीदी केंद्रों पर पर्याप्त बारदाना, सुचारु तुलाई और समयबद्ध भुगतान की व्यवस्था हो तथा मंडियों में किसानों की उपज का भुगतान नियमानुसार उसी दिन किया जाए।

किसानों को यूरिया, DAP और अन्य आवश्यक खाद उचित कीमत पर पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराने, खाद वितरण की ई-टोकन व्यवस्था में सुधार करने तथा सिकमी, बटाईदार, पट्टेदार और सम्मिलित भूधारक किसानों को खाद से वंचित नहीं करने की मांग भी उठाई गई है। वन भूमि अथवा राजस्व भूमि पर खेती करने वाले पात्र आदिवासी एवं गैर-आदिवासी किसानों को भी खाद, बीज, MSP पर खरीदी और सहकारी एवं खाद वितरण समितियों में सदस्यता सहित कृषि संबंधी सुविधाएँ देने की मांग की गई है।

मोर्चे ने किसानों के व्यापक कर्ज संकट को देखते हुए कर्जमाफी एवं ऋण राहत योजना लागू करने, सिंचाई के लिए दिन में लगातार 10 घंटे बिजली उपलब्ध कराने और कृषि पंपों की बिलिंग संबंधी अनियमितताओं को दूर करने की मांग की है।

भूमि अधिग्रहण और परियोजनाओं से प्रभावित किसानों के अधिकारों पर जोर

मांगपत्र में केन–बेतवा नदी जोड़ो परियोजना, रूंझ एवं मझगाँव बाँध तथा ललितपुर–सिंगरौली रेलमार्ग से प्रभावित किसानों और परिवारों को उचित मुआवजा, पुनर्वास एवं रोजगार देने की मांग प्रमुखता से उठाई गई है। मोर्चे ने भूमि अधिग्रहण कानून के प्रावधानों का पालन करने, प्रभावित परिवारों के अधिकार सुनिश्चित करने तथा शांतिपूर्ण किसान आंदोलनों के दौरान दर्ज अनुचित मुकदमों की समीक्षा कर उन्हें वापस लेने की मांग की है।

मोर्चे ने मध्यप्रदेश में प्रस्तावित सातों परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं पर तत्काल रोक लगाने की मांग करते हुए कहा है कि किसानों, आदिवासी समुदायों, ग्राम सभाओं, जलस्रोतों, कृषि भूमि और पर्यावरण पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का स्वतंत्र आकलन कराया जाना चाहिए। राज्य सरकार इन परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के बजाय सुरक्षित एवं विकेंद्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा विकल्पों को प्राथमिकता दे।

इसके अलावा नरवाई प्रबंधन के लिए किसानों को आर्थिक सहायता एवं कृषि यंत्रों पर पर्याप्त अनुदान, छोटे किसानों के लिए सामुदायिक मशीन बैंक, भूमि अभिलेखों एवं नक्शों की विसंगतियों का निराकरण, खेत सड़क योजना पुनः प्रारंभ करने, मंडी एवं सहकारी समितियों के चुनाव कराने, दूध, फल एवं सब्जी उत्पादकों को लाभकारी मूल्य देने तथा आदिवासी किसानों के वनाधिकार सुनिश्चित करने की मांगें भी रखी गई हैं।

ज्ञापन सौंपने के दौरान किसान जागृति संगठन के इरफान जाफरी, अखिल भारतीय किसान सभा के प्रहलाद बैरागी, क्रांतिकारी किसान मजदूर संगठन के लीलाधर राजपूत, बाबूसिंह राजपूत, मोहनीश, अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा के विजय कुमार, किसान सत्याग्रह के शिवम् बघेल तथा जनसंघर्ष समन्वय समिति, मध्यप्रदेश के समाधान पाटिल उपस्थित थे।

मध्यप्रदेश संयुक्त किसान मोर्चा ने सरकार से मांग की है कि ज्ञापन में उठाए गए सभी मुद्दों पर संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएँ, प्रमुख मांगों के निराकरण की समय-सीमा तय की जाए और किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर समस्याओं के समाधान की प्रक्रिया शुरू की जाए। मोर्चे ने यह भी मांग की है कि सरकार अपनी कार्रवाई की लिखित जानकारी उपलब्ध कराए और किसानों के सवालों को टालने अथवा उनके आंदोलनों को दबाने के बजाय संवाद के माध्यम से समाधान सुनिश्चित करे।

 

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