मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
सांची विकासखंड के दीवानगंज सहित अंबाडी, सेमरा, नरखेड़ा, जमुनिया, निनोद, बरजोरपुर, सरार, कयामपुर, संग्रामपुर, करैया, गीदगढ़, बालमपुर, कुलहड़िया, छोला और देहरी सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में जलझूलनी एकादशी (डोल ग्यारस) का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया।
इस अवसर पर दीवानगंज में तीन सुसज्जित विमानों में भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमाओं को विराजमान कर भव्य डोल यात्रा निकाली गई। ढोल-नगाड़ों और भजन-कीर्तन के बीच निकली शोभायात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
दीवानगंज के पुराने गुरुद्वारा मंदिर, राम जानकी मंदिर और इच्छापूर्ति हनुमान मंदिर से तीनों विमानों को आकर्षक रूप से सजाया गया। इनमें भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमाओं को विराजमान कर भवानी चौक स्थित राम जानकी मंदिर लाया गया। यहां श्रद्धालुओं ने भगवान की आरती कर पूजा-अर्चना की। इसके बाद तीनों विमान ढोल-नगाड़ों के साथ भवानी चौक से दीवानगंज के मुख्य मार्गों से होते हुए तालाब पहुंचे।

घर-घर हुआ भगवान का स्वागत
शोभायात्रा के दौरान श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला। जैसे ही विमान लोगों के घरों के सामने से गुजरे, महिलाओं, पुरुषों और बच्चों ने भगवान को तिलक लगाकर भोग अर्पित किया तथा आरती उतारकर स्वागत किया। कई श्रद्धालु भगवान के विमान के नीचे से निकलकर उनकी परिक्रमा करते हुए दिखाई दिए। इस दौरान पूरा क्षेत्र जयकारों और भजनों से गूंज उठा।
तालाब पर हुई आरती, गूंजे जयकारे
तालाब पहुंचने के बाद भगवान की विधि-विधान से आरती की गई। श्रद्धालुओं ने ‘हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की’, ‘राम लक्ष्मण जानकी, जय बोलो हनुमान की’ सहित विभिन्न जयकारे लगाए। भजन-कीर्तन के साथ आरती हुई और श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।
इसके बाद तीनों विमानों को वापस पुराने गुरुद्वारा मंदिर लाया गया, जहां फिर से पूजा-अर्चना और आरती हुई। ढोल-नगाड़ों की थाप पर देर तक भजन-कीर्तन चलता रहा। इसके बाद एक विमान को मंदिर में रखा गया, जबकि दो विमानों को लेकर श्रद्धालु भवानी चौक स्थित राम जानकी मंदिर पहुंचे। यहां भी देर रात तक भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजन चलते रहे।

रातभर चला धार्मिक उत्साह
डोल ग्यारस के अवसर पर कई श्रद्धालुओं ने अपने घरों में भी भगवान के विमान रखकर रातभर झूला झुलाया। पूरे क्षेत्र में दिनभर मंदिरों में पूजा-अर्चना और शाम से देर रात तक धार्मिक आयोजनों का दौर चलता रहा। पर्व को लेकर महिलाओं, बच्चों और युवाओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।
धार्मिक मान्यता के अनुसार जलझूलनी एकादशी पर भगवान श्रीकृष्ण की पालकी या विमान यात्रा निकालकर पूजा-अर्चना करने और भगवान के विमान के नीचे से निकलने की परंपरा है। श्रद्धालुओं का मानना है कि इससे जीवन के संकट और कष्ट दूर होते हैं तथा भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता है।