सुरेंद्र जैन धरसीवां रायपुर
शिक्षक दिवस के अवसर पर ऐसी शिक्षिकाओं का उल्लेख करना जरूरी है, जो अपने कर्तव्य को केवल नौकरी नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य निर्माण की जिम्मेदारी मानकर निभा रही हैं। शासकीय प्राथमिक शाला परसतराई में कार्यरत शिक्षिका रुबीना बेगम शिक्षा के साथ-साथ बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रयासरत हैं।
रुबीना बेगम का मानना है कि प्राथमिक शिक्षा बच्चे के जीवन की मजबूत नींव होती है। इसी सोच के साथ वे बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ गतिविधि आधारित शिक्षण, रचनात्मक कार्यों और खेल-खेल में सीखने के अवसर उपलब्ध कराने पर विशेष जोर देती हैं।
उनका प्रयास रहता है कि विद्यालय का प्रत्येक बच्चा आत्मविश्वास के साथ सीखे और अपनी प्रतिभा को पहचान सके। कमजोर विद्यार्थियों पर विशेष ध्यान देना तथा बच्चों में सीखने के प्रति रुचि पैदा करना उनकी कार्यशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
शिक्षा के क्षेत्र में उनके समर्पण और नवाचार को सम्मान भी प्राप्त हुआ है। वर्ष 2017 में उन्हें शिक्षा मंत्री के हाथों ‘शिक्षादूत पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया, जिसे वे अपने लिए प्रेरणा का स्रोत मानती हैं।
शिक्षक दिवस के अवसर पर उनका कहना है कि “एक शिक्षक के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि तब होती है, जब उसका विद्यार्थी आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ता है और जीवन में सफलता प्राप्त करता है।”
बच्चों के प्रति समर्पण, शिक्षा के प्रति जिम्मेदारी और निरंतर सीखने की भावना उन्हें एक प्रेरणादायी शिक्षिका के रूप में अलग पहचान देती है।