श्रीकृष्ण की ससुराल के रूप में विख्यात जामगढ़ होगा तीर्थ के रूप विकसित : मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल
जामगढ़ जहां श्रीकृष्ण के चरण पड़े, मुख्यमंत्री ने मंत्री श्रीपटेल की विशेष रुचि के तहत किया श्रीकृष्ण पाथेय में शामिल
कमल याज्ञवल्क्य बरेली रायसेन
मध्यप्रदेश के रायसेन जिले की बरेली तहसील के ग्राम जामगढ़ के निकट विंध्याचल क्षेत्र में स्थित जामवंत गुफा भगवान श्रीकृष्ण, जामवंत और स्यमंतक मणि से जुड़े पौराणिक प्रसंग के कारण विशेष महत्व रखती है। बुधवार शाम को मध्यप्रदेश सरकार के मंत्री और उदयपुरा विधानसभा के विधायक नरेन्द्र शिवाजी पटेल ने जामवंत गुफा के पास प्राचीन तालाब के किनारे श्रीरामजानकी मंदिर में वैदिक विधान से भगवान् बालकृष्ण की पूजा अर्चना की। तथा बालकृष्ण के दिव्य स्वरूप को अपने सिर पर विराजमान कर पैदल गांव की गली में निकल पड़े।

इससे पूर्व अपने संबोधन में मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल ने कहा कि मध्यप्रदेश की रायसेन जिले के उदयपुरा विधानसभा क्षेत्र सौभाग्यशाली है कि यहां सर्व कलाओं से संपन्न परमात्मा श्रीकृष्ण के चरण पड़े। उन्होंने कहा कि जामगढ़ की जामवंत गुफा को मध्यप्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव ने श्रीकृष्ण पाथेय में शामिल किया है। सरकार की योजना है इस ऐतिहासिक पुरा वैभवशाली स्थान को भव्य तीर्थ के रूप में विकसित किया जाए। यहां मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल का सम्मान किया गया तथा उन्हें साहित्यकार और वरिष्ठ पत्रकार सत्यनारायण याज्ञवल्क्य की चुनिंदा कविताओं का संग्रह “हम बंजारों का भला हुआ कौन सा देश ” की प्रति भेंट की।

जामगढ़ से खरगोन तक गूंजे श्रीकृष्ण के भजन, बालकृष्ण भगवान् की हुई जय जयकार
बुधवार शाम को मप्र शासन, श्रीकृष्ण पाथेय न्यास, संस्कृति विभाग, जिला प्रशासन रायसेन और शिवाजी फाउंडेशन के सहयोग से श्रीकृष्ण पर्व के तहत ‘‘कृष्णायन‘‘ कार्यक्रम का आयोजन खरगोन में हुआ। जिसमें नृत्य, नाट्य और कथा के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण की विविध लीलाओं को प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल, स्थानीय जनप्रतिनिधि, बरेली एसडीएम अंकित जैन, बरेली एसडीओपी कुंवर सिंह मुकाती सहित कई अधिकारी और बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण ‘‘कृष्णायन: सुनो वो जो कभी कहा नहीं गया‘‘ शीर्षक से प्रस्तुत श्रीकृष्ण केंद्रित संगीतमयी प्रस्तुति रही। इसके पूर्व श्रीकृष्ण- जामवंत केन्द्रित महानाट्य की प्रस्तुति हुई जिसका निर्देशन शिरीष राजपुरोहित उज्जैन द्वारा किया गया है। इस महानाट्य के माध्यम से श्रीकृष्ण के जीवन के उन भावों, प्रसंगों और दृष्टिकोणों को मंच पर उकेरने का प्रयास किया गया जो उनकी विराट कथा के बीच अक्सर अनकहे रह जाते हैं। विख्यात कथा वाचक मोहित शेवानी ने कृष्णायन के तहत सुनो वो जो कभी नहीं कहा गया… की शानदार प्रस्तुति से मन मुग्ध कर दिया।

इस अवसर पर यहाँ मंत्री श्री पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में पूरे प्रदेश में बड़े ही धूमधाम के साथ श्रीकृष्ण पर्व मनाया जा रहा है। यह हम सभी क्षेत्रवासियों के लिए गौरव की बात है कि उदयपुरा विधानसभा के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों में से एक जामगढ़ जो भगवान श्रीकृष्ण जी की ससुराल मानी जाती है। यह ऐसा पावन स्थल है जिसे मध्यप्रदेश सरकार ने ‘‘श्रीकृष्ण पाथेय‘‘ में भी सम्मिलित किया है।

उल्लेखनीय है कि रायसेन जिले की बरेली तहसील के जामगढ़ के निकट स्थित जामवंत गुफा श्रीकृष्ण से जुड़ी लोक मान्यताओं के कारण विशेष महत्व रखती है। मान्यता है कि स्यमंतक मणि की खोज के प्रसंग में भगवान श्रीकृष्ण का सामना जामवंत से इसी गुफा में हुआ था। कथा के अनुसार दोनों के बीच लंबे समय तक युद्ध हुआ और अंततः जामवंत ने श्रीकृष्ण में अपने आराध्य भगवान राम के स्वरूप का दर्शन किया। इसके बाद उन्होंने स्यमंतक मणि श्रीकृष्ण को सौंप दी और अपनी पुत्री जाम्बवती का विवाह उनसे कराया।

इस प्रकार जामगढ़ की जामवंत गुफा वह पावन तीर्थ है जहां परमात्मा श्रीकृष्ण के चरण पड़े। भगवान् श्रीकृष्ण पर लगा स्यमन्तक मणि की चोरी का मिथ्या कलंक जामवंत गुफा में दूर हो गया था। माना जाता है कि जामवंत गुफा के दर्शन से व्यक्ति मिथ्या आरोप से मुक्त हो जाता है। जामगढ़ के नागरिक भगवान् श्रीकृष्ण जी को अपना दामाद मानकर पूजा करते हैं।