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कलेक्टर अरुण विश्वकर्मा ने सांची में महाबोधी सोसायटी पहुंचकर प्राचीन पांडुलिपियों का किया अवलोकन

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जिले में ज्ञान भारतम मिशन के तहत पांडुलिपियों को डिजिटल रूप में किया जा रहा है संरक्षित

जिलेवासियों से निजी संग्रहों की जानकारी साझा करने की अपील

 मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन 

भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित ज्ञान भारतम अभियान के तहत रायसेन जिले में भी विभिन्न धार्मिक स्थलों, मंदिरों, संस्थाओं एवं निजी संग्रहों से प्राचीन पाण्डुलिपियों को चिन्हित कर ज्ञान भारतम एप पर अपलोड करने का कार्य किया जा रहा है। इन पाण्डुलिपियों में हस्तलिखित प्राचीन पोथियाँ, पुराण, धार्मिक ग्रंथ तथा अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज शामिल हैं। इन पाण्डुलिपियों का डिजिटलीकरण होने से न केवल उनकी मूल सामग्री सुरक्षित रह सकेगी! बल्कि शोध, अध्ययन एवं भावी पीढ़ियों के लिए भी ज्ञान का एक महत्वपूर्ण स्रोत उपलब्ध होगा। गुरूवार को कलेक्टर श्री अरूण कुमार विश्वकर्मा द्वारा सांची स्थित महाबोधी सोसायटी पहुंचकर यहां उपलब्ध प्राचीन पांडुलिपियों का अवलोकन किया गया। इस दौरान जिला पंचायत सीईओ श्री कमल सोलंकी तथा बौद्ध धर्मगुरू सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

ज्ञान भारतम अभियान के तहत जिले में कलेक्टर श्री विश्वकर्मा के मार्गदर्शन में गठित सर्वेक्षण दल द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में निरंतर संपर्क, सर्वेक्षण एवं दस्तावेजीकरण का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि रायसेन जिले की छिपी हुई सांस्कृतिक विरासत को खोजकर संरक्षित करना जिला प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। जिले में प्राचीन गढ़ियों, मठों, मंदिरों, धार्मिक संस्थानों, पुस्तकालयों एवं निजी संग्रहों में सुरक्षित पाण्डुलिपियों की पहचान कर उन्हें ज्ञान भारतम एप पर पंजीकृत किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि अनेक परिवारों एवं संस्थाओं के पास पीढ़ियों से सुरक्षित हस्तलिखित दस्तावेज, पुराने पत्राचार, जिले में धार्मिक ग्रंथ, वंशावली अभिलेख, साहित्यिक रचनाएँ, राजकीय आदेश, ऐतिहासिक दस्तावेज एवं अन्य पाण्डुलिपियाँ उपलब्ध हो सकती हैं! जिनका ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व अत्यंत महत्वपूर्ण है। जानकारी के अभाव में ऐसे बहुमूल्य दस्तावेज समय के साथ नष्ट होने की स्थिति में पहुँच जाते हैं। उन्होंने जिलेवासियों से अपील की है कि यदि उनके घर, परिवार, संस्था अथवा निजी संग्रह में 75 वर्ष या उससे अधिक पुरानी कोई हस्तलिखित पाण्डुलिपि, अभिलेख, पत्राचार, साहित्यिक ग्रंथ या अन्य ऐतिहासिक दस्तावेज उपलब्ध हैं, तो उनकी जानकारी जिला प्रशासन को अवश्य दें।

नागरिक स्वयं भी ज्ञान भारतम एप के माध्यम से अपनी पाण्डुलिपियों का पंजीकरण कर सकते हैं अथवा जिला प्रशासन से संपर्क कर सकते हैं। इस अभियान का उद्देश्य केवल पाण्डुलिपियों का डिजिटल संरक्षण और दस्तावेजीकरण करना है। मूल पाण्डुलिपियाँ संबंधित व्यक्ति, परिवार या संस्था के पास ही सुरक्षित रहेंगी। डिजिटलीकरण के माध्यम से उनकी सामग्री को भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित किया जाएगा।

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