2 दिन की बारिश में ही अंबाडी-छपरई रेलवे पुलिया बनी दलदल, जान जोखिम में डालकर तीन रेलवे पटरियां पार कर रहे ग्रामीण
सबसे ज्यादा परेशानी विद्यार्थियों की
मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
सांची विकासखंड के अंबाडी-छपरई क्षेत्र में लगातार दो दिन की बारिश ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। रेलवे द्वारा बंद किए गए अंबाडी-छपरई फाटक के स्थान पर बनाई गई अंडरपास पुलिया पानी से लबालब भर गई है, जिससे छह गांवों के लोगों का संपर्क प्रभावित हो गया है। मजबूरी में ग्रामीण और स्कूली छात्र-छात्राएं रोजाना तीन रेलवे पटरियां पार कर आवागमन कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी भी दिन यहां बड़ा हादसा हो सकता है।
अंबाडी, सेमरा, केमखेड़ी, कालीटोर, पिपरई, मुनारा और खेड़ा सहित आसपास के गांवों के लोग वर्षों से रेलवे फाटक खोलने की मांग कर रहे हैं। करीब सात वर्ष पहले रेलवे विभाग ने फाटक को पूरी तरह बंद कर दिया था। इसके बाद बनाए गए अंडरपास में हर बारिश के मौसम में पानी भर जाता है, जिससे चार महीने तक मार्ग लगभग बंद रहता है।

ग्रामीणों के अनुसार भोपाल-बीना रेलखंड पर हर कुछ मिनट में ट्रेन गुजरती है, बावजूद इसके रोजाना 150 से 200 मोटरसाइकिल चालक और बड़ी संख्या में पैदल यात्री रेलवे पटरियां पार करने को मजबूर हैं। सबसे अधिक परेशानी स्कूली विद्यार्थियों को हो रही है, जिन्हें दीवानगंज और सेमरा के स्कूलों तक पहुंचने के लिए रोज तीन रेलवे लाइनें पार करनी पड़ती हैं।
स्थानीय लोगों ने बताया कि कुछ महीने पहले पटरी पार करते समय एक छात्र की ट्रेन की चपेट में आने से मौत भी हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। सबसे ज्यादा परेशानी तब होती है जब गांव में किसी की डिलीवरी होना हो या किसी बीमार व्यक्ति को अस्पताल ले जाना हो उस समय जान जोखिम में डालकर रेल की पटरिया पार करना पड़ता है। इस लाइन पर हर 15 मिनट में दोनों तरफ से रेलों का आना-जाना लगा रहता है।
विद्यार्थियों ने बयां की परेशानी
छात्रा राधिका वंशकार ने बताया कि गांव में पांचवीं तक ही स्कूल है। आगे की पढ़ाई के लिए उन्हें सेमरा हाई स्कूल जाना पड़ता है। पुलिया में पानी भरने के कारण रोज रेलवे पटरी पार कर पैदल स्कूल पहुंचना पड़ता है।
वहीं छात्रा रेणुका लोधी ने कहा कि बारिश के चार महीने पुलिया में पानी भरा रहता है। न कोई पैदल निकल सकता है और न ही वाहन। मजबूरी में छात्र-छात्राओं को कई किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाना पड़ता है और रास्ते में तीन रेलवे पटरियां पार करनी पड़ती हैं।

ग्रामीणों में नाराजगी
स्थानीय निवासी आकाश सिंह ने बताया कि बारिश होते ही मार्ग पूरी तरह बंद हो जाता है। ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर रेलवे पटरियों के ऊपर से मोटरसाइकिल निकालने को मजबूर हैं।
अंबाडी सरपंच कुंती रमेश कुमार अहिरवार ने बताया कि वर्षों पहले रेलवे के डीआरएम को आवेदन देकर फाटक खोलने या वैकल्पिक व्यवस्था की मांग की गई थी, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों ने रेलवे प्रशासन और जिला प्रशासन से अंबाडी-छपरई अंडरपास की जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त करने तथा बंद रेलवे फाटक की समस्या का स्थायी समाधान निकालने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो यहां कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।