देवेन्द्र तिवारी सांची, रायसेन
वैसे तो स्वच्छता के नाम पर लाखों करोड़ों की भेंट चढ़ गई परन्तु गंदगी की चपेट में नगर जकड़ गया ।एक तरफ शासन प्रशासन नाले नालियों को अतिक्रमण मुक्त करने का संदेश दे रहे है तो दूसरी ओर इस नगर के नाले नालियों को अतिक्रमण कारियों ने अपने कब्जे में लेकर समस्या खडी कर दी परन्तु प्रशासन असरदारो के आगे नतमस्तक हो कर चुप्पी साध बैठा है ।जिससे मच्छरों की तादाद बढने से लोगों मैं चिंता बढ रही है।
जानकारी के अनुसार यह नगर एक विश्व पटल पर अपनी साख बनाये हुए हैं शासन प्रशासन द्वारा लगातार इस ऐतिहासिक स्थल को स्वच्छ सुंदर बनाने पर लाखों करोड़ों की भेंट चढ़ा दी गई परन्तु स्वच्छता के नाम पर लगातार गंदगी अपने पांव पसारती दिखाई दे रही है हालांकि सडकों तक बैनर लेकर स्वच्छता का संदेश देना इस स्थल पर किसी से छिपा नहीं हुआ है परन्तु जमीनी हकीकत स्वयं अपने स्तर से बयां कर रही है इतना ही नहीं शासन प्रशासन अनेक बार नाले नालियों को अतिक्रमण मुक्त करने की कवायद चला चुका परन्तु अतिक्रमण कारी नाले नालियों को अतिक्रमण मुक्त नहीं कर सके । हद तो तब हो गई जब अतिक्रमण कारियों ने अपने प्रभाव के चलते नाले नालियों पर पक्के निर्माण कर डाले बताया तो यहां तक जाता है कि स्थानीय प्रशासन की कहीं न कहीं मिलीभगत से भी इंकार नहीं किया जा सकता है न ही प्रशासन इन अतिक्रमण को रोकने मे आगे बढ़ सका बल्कि देखकर भी अनजान बना रहना कहीं न कहीं सवाल खड़े कर रहा है यहां तक कि अतिक्रमण इस नगर में इतना हावी हो चुका है कि सडकों को भी गलियों का रूप लेना पडा है जिससे लोगों को खासी परेशानी से जूझना पड़ रहा है इस अतिक्रमण कारियों के बढते हौसले से इस स्थल की छवि भी दागदार हो चली है परन्तु स्थानीय प्रशासन बेखबर होकर रह गया है नगर भर मे फैलती गंदगी जहां नगर के वातावरण को प्रदूषित कर रही है तो दूसरी ओर मच्छरों की बढती संख्या से बीमारियों का अंदेशा भी बढ गया है इस स्थल पर पहले तो कुछ कीटनाशक दवाओं का छिडकाव हो जाता था परन्तु वह भी लंबे अरसे से थम चुका है।इस स्थल की प्रसिद्धि को देखते हुए जमीनी स्तर पर स्वच्छता एवं नगर के नाले नालियों को अतिक्रमण मुक्त कराने की जरुरत मेहसूस की जाने लगी है।इस स्थल की प्रसिद्धि बनाने में कब प्रशासन की नींद टूटेगी।