देवेन्द्र तिवारी सांची, रायसेन
करोड़ों रुपये की लागत से अस्पताल भवन बना दिया तथा उसे सिविल अस्पताल का दर्जा भी दे दिया गया ।जोरशोर से शुभारंभ किया गया तथा बडी बडी बातें देखने सुनने में आई बावजूद इसके उद्घाटन के बाद ही इस अस्पताल में सुविधाओं को भुला दिया गया ।आज यह अस्पताल सुविधाओं की बाट जोह रहा है।
जानकारी के अनुसार इस ऐतिहासिक स्थल का पहले अस्पताल प्रार्थमिक हुआ करता था इस स्थल के अनुरूप इस अस्पताल का दर्जा सिविल अस्पताल का मिल गया तथा सिविल अस्पताल के लिए करोड़ों रुपए की लागत से एक सुंदरता भवन का निर्माण किया गया ।तथा इस अस्पताल का उद्घाटन बडे जोरशोर से एक समारोह पूर्वक किया गया तथा उद्घाटन समारोह में इस अस्पताल को मिलने वाली सुविधाओं की बडी बडी बातें देखने सुनने को मिली तब नगर वासियों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा कि लोगों को पूरी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध रहेगी तथा सरकार ने आननफानन मे करोड़ों रुपये की इस अस्पताल को मशीन उपलब्ध करा दी गई जिससे तमाम जांचे यही हो सके ।परन्तु समय के साथ इस अस्पताल की सुध लेने की न तो सरकार को सुध रह सकी न ही प्रशासन को फुरसत मिल सकी जिससे इस अस्पताल को सुविधाएं उपलब्ध होने के लिए भी इंतजार करना पड रहा है इस अस्पताल मे एक्सरा मशीन लंबे समय तक बिगडी रही हालांकि एक माह पूर्व ही एक्सरा मशीन सुधर सकी जिससे लोगों को एक्सरा मशीन से छुटकारा मिल गया परन्तु अनेक ऐसी मशीन जो अस्पताल में लग तो गई परन्तु आपरेटर के अभाव में तालों मे कैद होकर रह गई तथा धूल की चादर ओढ़ चली इसके साथ ही सिविल अस्पताल होने के कारण चौबीस घंटे में कुल तीन स्थाई डाक्टर के भरोसे अस्पताल चल रहा है हालांकि व्यवस्था के लिए अनुबंधित डाक्टरों का सहारा लेना पडा जबकि इस अस्पताल में लगभग 8 डाक्टर इनमें विभिन्न बीमारियों के विशेषज्ञ पदस्थ किया जाना चाहिए परन्तु यह अस्पताल विशेषज्ञ विहीन अस्पताल बनकर रह गया है न तो शिशु विशेषज्ञ न ही हड्डी विशेषज्ञ न ही नेत्र सहित अन्य बीमारियों के विशेषज्ञ ही पदस्थ हो सके तब आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस स्थिति में लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होना मजाक बनकर रह गया तथा सिविल अस्पताल का मात्र भवन अपनी कहानी स्वयं बयां कर रहा है इस सिविल अस्पताल में न तो डाक्टरों के लिए कोई आवास व्यवस्था है न ही उन्हें विश्राम करने की कहीं कोई व्यवस्था ही हो सकी यही हाल इस अस्पताल में लगभग 59 कर्मचारी चौबीस घंटे अपनी सेवाएं प्रदान करते हैं परन्तु उन्हें आवास की समस्या से जूझना पड़ रहा है इस स्थिति में अस्पताल डाक्टर एवं कर्मचारियों को किराए के भवनों का सहारा लेना पड रहा है अथवा अपडाउन कर अपनी सेवा दे रहे है जबकि इस स्थल पर बडी संख्या में सरकारी भूमि खंडहर भवन विभिन्न विभागों के अंतर्गत आने वाले या तो अनैतिक गतिविधियों का अड्डा बन कर रह गए अथवा बडी संख्या में अतिक्रमण कारियों की भेंट चढ़ चुके है हालांकि इस स्थल पर विकास स्तरीय दफ्तर मे बडी संख्या में कर्मचारी पदस्थ हैं परन्तु सभी विभाग आवासहीन बने हुए हैं जिससे कर्मचारियों को विवश होकर अपडाउन करने मजबूर होना पडता हैं इस स्थल की बेशकीमती भूमि अतिक्रमण कर्ताओं से शासन प्रशासन मुक्त कराने की हिम्मत जुटा ले तो करोड़ों रुपये की भूमि मुक्त होकर कर्मचारियों को आवास का सहारा बन सकती है ।