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भेल के स्नाकोत्तर महाविधालय के प्रथम प्राचार्य डा.जैसवाल के चित्र का मंत्री श्रीमती कृष्णा गौर द्वारा अनावरण 

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भोपाल । बाबूलाल गौर शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय भेल भोपाल के सेमीनार हाल में प्रथम प्राचार्य डा. डी. वी. जैसवाल के चित्र का अनावरण  श्रीमती कृष्णा गौर मंत्री म.प्र.शासन द्वारा किया गया .

इस अवसर पर  श्रीमती कृष्णा गौर ने कहा कि किसी भी संस्था को प्रारंभ करने में बहुत चुनौतियां होती हैं.डा जैसवाल के कुशल नेतृत्व ने उनका सूझबूझ से सामना किया परिणामस्वरूप आज यह एक प्रतिष्ठित महाविद्यालय बन पाया.कार्यक्रम में जनभागीदारी अध्यक्ष  बारेलाल अहिरवार ,प्राचार्य डा संजय जैन ,सदस्य  तेजसिंह ठाकुर सहित समस्त महाविद्यालय परिवार ने अपने श्रृद्धा सुमन पुष्पांजलि के रुप में अर्पित किए

उल्लेखनीय है कि जनभागीदारी समिति की बैठक में लिए निर्णय अनुसार नवीन भवन में स्थित एक सभागार का नाम महाविद्यालय के प्रथम प्राचार्य ,”डा डी वी जैसवाल सभागार “के रूप में किया गया है .इस निर्णय की  मंत्री श्रीमती कृष्णा गौर ने बहुत प्रशंसा की है

वर्ष 1984 में डा.जैसवाल को एक ऐतिहासिक दायित्व सौंपा गया

शासकीय भेल कॉलेज के प्रथम प्राचार्य के रूप में संस्थान की स्थापना और संचालन। यह कार्य अनेक चुनौतियों से भरा हुआ था, किंतु डॉ. जैसवाल ने अद्भुत धैर्य, नेतृत्व क्षमता और दूरदर्शिता के साथ इस दायित्व को सफलतापूर्वक निभाया। उन्होंने जिस मजबूत नींव की स्थापना की, उसी का सुदृढ़ परिणाम आज हम इस महाविद्यालय को प्रतिष्ठित संस्थान के रूप में देख पा रहे हैं।भेल कॉलेज में अपने सफल कार्यकाल के उपरांत भी डा जैसवाल राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था से निरंतर जुड़े रहे। उन्होंने संयुक्त संचालक, अपर संचालक, समन्वय समिति के अध्यक्ष तथा राज्य यूजीसी (State UGC) जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य करते हुए शिक्षा नीति, गुणवत्ता सुधार और संस्थागत विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया।

डॉ. जैसवाल एक महान गणितज्ञ थे। फिबोनाची श्रेणी पर किया गया उनका शोध आज भी वैश्विक स्तर पर विद्वानों द्वारा आगे बढ़ाया जा रहा है। उनका शैक्षणिक योगदान कालजयी है, जो आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करता रहेगा।उनके कई शिष्य आज न केवल मध्य प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग में उच्च पदों पर कार्यरत हैं, बल्कि देश के विभिन्न सरकारी एवं गैर-सरकारी महत्वपूर्ण संस्थानों का नेतृत्व भी कर रहे हैं। यह उनके शिक्षक रूप की सबसे बड़ी उपलब्धि है।

डॉ. डी. वी. जैसवाल एक सच्चे मानवतावादी थे। सरलता, विनम्रता, निस्वार्थ सेवा और शिक्षा के प्रति उनका समर्पण उन्हें एक असाधारण व्यक्तित्व बनाता है। उन्होंने अपने जीवन से यह सिद्ध किया कि शिक्षा केवल ज्ञान का हस्तांतरण नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र निर्माण का सबसे सशक्त माध्यम है।आज वे हमारे बीच शारीरिक रूप से भले ही न हों, किंतु उनके विचार, मूल्य और कार्य सदैव जीवित रहेंगे। विशेष रूप से मध्य प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था के विकास में उनका योगदान अमिट और अविस्मरणीय है।यह महाविद्यालय परिवार अपने प्रथम प्राचार्य डा डी.वी.जैसवाल के प्रति सदैव कृतज्ञ रहेगा।

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