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पंडित धीरेंद्र शास्त्री की दरियादिली, कथा से पहले रास्ते में मिलीं वृद्ध महिला, गाड़ी में बैठाकर मंच पर साथ लाए, प्राण आरती कराई

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– पंडित धीरेंद्र शास्त्री एक बूढ़ी अम्मा को कथा मंच पर लाए, प्राण आरती कराई, गमछा ओढ़ाते ही चमक उठी आंखें

– जिन सड़कों और नगरों के नाम आक्रांताओं पर, इनके नाम बदलें- धीरेंद्र शास्त्री

रंजीत गुप्ता शिवपुरी

शिवपुरी में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की श्रीमद् भागवत कथा जारी है। इस दौरान बड़ी संख्या में भक्तगण दूर-दूर से आ रहे हैं। कथा स्थल से लेकर नक्षत्र गार्डन तक भक्ति का ऐसा प्रवाह बह रहा है कि – मानो पूरी शिवपुरी कृष्ण भक्ति में डूब गई हो। शहर की सड़कों पर सनातनियों का सैलाब नजर आ रहा है। पार्किंग एरिया मिलाकर 65 बीघा का कथास्थल एक विशाल मेला का रूप ले चुका है।

बड़े स्नेह से अम्मा को सहारा देकर गाड़ी में बैठाया

बुधवार को कथा स्थल जाते समय पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने रास्ते में खड़ी एक बूढ़ी अम्मा को देखा। थकी-सी, डगमगाती चाल और आंखों में कथा सुनने की गहरी श्रद्धा देखकर उन्होंने तुरंत अपनी गाड़ी रुकवाई। बड़े स्नेह से अम्मा को सहारा देकर गाड़ी में बैठाया। कथा स्थल पहुँचने पर भी उन्होंने अम्मा का हाथ नहीं छोड़ा। आयोजक परिवार के साथ स्वयं उन्हें मंच तक ले गए। वहाँ अम्मा को आरती कराई और गमछा पहनाकर सम्मानित किया। यह दृश्य देखकर पूरा पंडाल भावुक हो उठा मानो माँ के चरणों में श्रद्धा और सेवा की जीवंत मिसाल सामने हो।

जिन सड़कों और नगरों के नाम आक्रांताओं पर, इनके नाम बदलें

धीरेंद्र शास्त्री ने सरकार से आग्रह किया कि भारत की शिक्षा प्रणाली में संस्कृति के प्रचार के लिए आवश्यक बदलाव किए जाएं। उन्होंने कहा कि पहली कक्षा से ही रामचरित मानस को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए और कक्षा 10 के बाद श्रीमद्भगवद्गीता का अध्ययन अनिवार्य होना चाहिए। शास्त्री ने विदेशी आक्रांताओं के नाम पर रखी गई सड़कों और नगरों के नाम बदलने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि यह देश रघुवर का है, बाबर या अकबर का नहीं। साथ ही शहीदों को सम्मान देने और मातृभूमि के लिए न्यौछावर करने वाले आदर्शों को युवा पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता बताई।

शिवपुरी में कथा का इतिहास बन रहा-

कथा के तीसरे दिन खुद धीरेंद्र शास्त्री आत्मविभोर होकर बोले कि यहां शिवपुरी में कथा का इतिहास बन रहा है। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम में रामचरित मानस और गीता शामिल हो। शिवपुरी वासियों की आस्था देख शास्त्री इतने अधिक प्रभावित हुए कि उन्होंने व्यासपीठ से प्रार्थना भरे लहजे में भगवान से कहा कि जो जिस भाव से बैठा है, वो पूरा कर देना। जो जैसी अर्जी लेकर आए, मनोकामना पूरी कर देना।

आज गुरुवार को लगेगा दिव्य दरबार-

श्रीमद भागवत कथा के तीसरे दिन शास्त्री ने परीक्षित को गर्भ में भगवान के दर्शन, कलयुग का परीक्षित से संवाद और कलयुग का पांच स्थानों में वास आदि का वर्णन किया। अब कथा के चौथे दिन गुरुवार को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का वृतांत सुनाया जाएगा। कथा से पहले दिव्य दरबार लगेगा।

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