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सुषमा पटेल: ग्राम घानामैली से टी-20 दृष्टिबाधित महिला क्रिकेट विश्व कप तक का सफर

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भारत ने पहला टी-20 दृष्टिबाधित महिला क्रिकेट विश्व कप अपने नाम किया

रिपोर्ट धीरज जॉनसन दमोह

नेपाल को फाइनल मुकाबले में हराकर भारत ने पहला टी-20 दृष्टिबाधित महिला क्रिकेट विश्व कप अपने नाम कर लिया। इस जीत में मध्यप्रदेश के दमोह जिले के ग्राम घानामैली की सुषमा पटेल ने भी भूमिका निभाई।

11 नवंबर से 23 नवंबर तक दिल्ली, बेंगलुरु और कोलंबो में आयोजित इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताब पर कब्जा किया।

जीत की खुशी बयां करते हुए सुषमा पटेल ने कहा कि यह सफलता आयोजक क्रिकेट एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड (सीएबीआई) और समर्थनम ट्रस्ट फॉर द डिसेबल के निरंतर प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने बताया “पहले दृष्टिबाधित वर्ल्ड कप में जीत से न सिर्फ पहचान मिलेगी, बल्कि समाज में यह संदेश भी जाएगा कि ब्लाइंड भी बहुत कुछ कर सकते हैं। यदि प्रोत्साहन मिले तो दृष्टिबाधित खिलाड़ी भी देश का नाम रोशन कर सकते हैं।”

सुषमा ने बताया कि माता-पिता को भी चाहिए कि वे दृष्टिबाधित बच्चों से उनकी रुचियों के बारे में पूछें और प्रोत्साहित करें, ताकि वे अपनी तरक्की की राह खुद चुन सकें।

23 वर्षीय सुषमा पटेल का जन्म दमोह जिले के ग्राम घानामैली में एक साधारण परिवार में हुआ, जिनकी तीन बहन और दो भाई है। बचपन में लगी एक चोट से उनकी दृष्टि बाधित हुई, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। पिता बाबूलाल पटेल और मां लक्ष्मी रानी पटेल ने मुश्किल हालात के बावजूद बच्चों को हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

फिजिकल एजुकेशन और स्पोर्ट्स में स्नातक सुषमा का क्रिकेट सफर वर्ष 2022 में भोपाल से शुरू हुआ, जब उन्होंने मुख्यधारा के डिवीजन मैचों के ट्रायल दिए। बॉल को जज करने में कठिनाई देखने के बाद कोच ने उन्हें ब्लाइंड क्रिकेट और सीएबीएमपी के बारे में जानकारी दी। फरवरी 2022 में आयोजित राष्ट्रीय चयन शिविर में उन्होंने बेहतरीन प्रदर्शन कर मध्यप्रदेश की महिला ब्लाइंड क्रिकेट टीम में जगह बनाई। राष्ट्रीय टूर्नामेंट में 3 में से 2 मैचों में शतक लगाकर वह प्लेयर ऑफ द सीरीज़ बनीं।

इसके बाद (सीएबीआई) ने भारत-नेपाल द्विपक्षीय सीरीज़ के लिए भारतीय टीम का गठन किया और सुषमा को टीम कप्तान नियुक्त किया। वर्ष 2023 में इंग्लैंड में आयोजित वर्ल्ड ब्लाइंड गेम्स में भी सुषमा उन खिलाड़ियों में शामिल रहीं जिन्होंने भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता।

उनके नेतृत्व में मध्यप्रदेश महिला ब्लाइंड क्रिकेट टीम राष्ट्रीय चैंपियन बनी। अब पहले महिला ब्लाइंड टी-20 विश्व कप में पहुंचकर भारत की ऐतिहासिक जीत की गवाह बनीं।सुषमा की यह उपलब्धि गर्व का विषय और सीख है कि हौसले और मेहनत से कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती।

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