सैयद मसूद अली पटेल गैरतगंज रायसेन
जिले की गैरतगंज तहसील मे एकमात्र सिविल अस्पताल भवन इन दिनों स्थाई और अनुभवी डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है। वर्तमान में यह अस्पताल केवल बंधपत्र (अस्थाई) डॉक्टरों की देखरेख में संचालित हो रहा है, जिसके चलते मरीजों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
गैरतगंज सिविल अस्पताल को दर्जा तो मिल गया है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर स्थिति बेहद खराब है। अस्पताल के सबसे महत्वपूर्ण पहलू, स्थाई अनुभवी डॉक्टरों की तैनाती, यहां नहीं है। डॉक्टरों की वर्तमान स्थिति देखें तो हाल ही में पदस्थ हुए बीएमओ संदीप यादव अपने दफ्तरी कामों में व्यस्त रहते हैं। वहीं, एक अन्य पदस्थ डॉक्टर नीलेश चौरसिया को हफ्ते में सिर्फ एक दिन इमरजेंसी ड्यूटी के लिए तैनात किया गया है।

इनके अलावा, अस्पताल में पाँच बंधपत्र डॉक्टर ओपीडी संभाल रहे हैं। ये सभी डॉक्टर अपनी डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी करने के बाद एक वर्ष की ट्रेनिंग के लिए यहां पदस्थ किए गए हैं, जिनका अनुभव अभी काफी कम है। नतीजतन, गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए क्षेत्रीय मरीजों को निजी अस्पतालों या फिर बाहरी क्षेत्रों में जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। खासतौर पर महिला मरीजों को सर्वाधिक कठिनाई हो रही है। कुल मिलाकर, सिविल अस्पताल के ये हालात क्षेत्रवासियों को लंबे समय से मुंह चिढ़ा रहे हैं और यह क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों के उदासीन रवैए को भी दर्शाता है।
कलेक्टर ने दिया शीघ्र समाधान का आश्वासन
इस संबंध में रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा से चर्चा की गई। कलेक्टर श्री विश्वकर्मा ने बताया कि डॉक्टरों के रिक्त पदों की पूर्ति शासन स्तर से होनी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि गैरतगंज अस्पताल की इस परेशानी को देखते हुए, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से चर्चा कर जल्द ही इस समस्या का समुचित हल निकाला जाएगा।