आपातकालीन सुविधाओं के नाम पर शून्य स्थिति
सैयद मसूद अली पटेल गैरतगंज रायसेन
जिले की गैरतगंज तहसील के सिविल अस्पताल में लंबे समय से इमरजेंसी वाहनों का घोर अभाव है, जिसके चलते आपातकालीन स्थिति में मरीज़ों को रेफर करने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से सिविल अस्पताल का दर्जा तो मिल गया और करोड़ों की लागत से भव्य भवन भी बन गया, लेकिन आवश्यक संसाधनों और स्वास्थ्य सेवाओं की पूर्ति पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कोई ध्यान नहीं है।
क्षेत्र वासियों के लिए इमरजेंसी सेवाओं की दयनीय स्थिति है अस्पताल में वर्तमान में 108 इमरजेंसी वाहन की संख्या केवल एक है, और जननी एक्सप्रेस वाहनों की स्थिति नगण्य है। रेफर होने वाले मरीज़ों को वाहन के लिए 108 डायल करने पर या तो उपलब्धता न होने का जवाब मिलता है या घंटों इंतज़ार करने को कहा जाता है। इसके कारण मरीज़ों को अक्सर निजी वाहन करके इलाज कराने पर मजबूर होना पड़ता है। अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि वर्तमान में वे एक कंडम वाहन से एम्बुलेंस का काम चला रहे हैं। मरीज़ों को बाहर इलाज के लिए भेजने या गर्भवती महिलाओं को लाने के लिए अस्पताल के पास कोई वाहन नहीं है, जिससे उन्हें अक्सर मरीज़ों के परिजनों के आक्रोश का सामना करना पड़ता है।
8 इमरजेंसी वाहनों की है आवश्यकता
तहसील क्षेत्र की बड़ी जनसंख्या को देखते हुए, सिविल अस्पताल को फ़िलहाल कुल 8 इमरजेंसी वाहनों की सख्त आवश्यकता है। इसमें ग्रामीण क्षेत्रों से गर्भवती महिलाओं को लाने-ले जाने के लिए 4 जननी वाहनों और गंभीर हालात वाले मरीज़ों को जिला अस्पताल रेफर करने के लिए सर्वसुविधायुक्त छः 108 एवं एम्बुलेंस की ज़रूरत है, जिनमें सिलेंडर सहित अन्य आपातकालीन सेवाएं उपलब्ध हों। प्रबंधन द्वारा कई बार वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराने के बावजूद इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया है।
स्वास्थ्य मंत्री के हटने के बाद चरमराई व्यवस्था
तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री और क्षेत्रीय विधायक डॉ. प्रभुराम चौधरी के प्रयासों से सिविल अस्पताल को यह दर्जा मिला था, और उस समय इमरजेंसी वाहनों सहित अन्य व्यवस्थाएं ठीक थीं। हालांकि, विधानसभा चुनाव के बाद डॉ. चौधरी के मंत्री पद से हटते ही सिविल अस्पताल की स्थिति चरमरा गई। आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने अस्पताल की सेवाएं और संसाधनों को खत्म कर दिया।
मंत्री के क्षेत्र में शिफ्ट किए गए वाहन:
सूत्रों के अनुसार, सिविल अस्पताल गैरतगंज और देवनगर में पहले लगभग आधा दर्जन से अधिक 108 और जननी वाहन हुआ करते थे। विधानसभा चुनाव के बाद इन वाहनों को मध्यप्रदेश शासन में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने अपने क्षेत्र उदयपुरा, बाड़ी सहित अन्य क्षेत्रों में शिफ्ट करा लिया, जिससे गैरतगंज के अस्पतालों को सुविधा विहीन कर दिया गया है।