– फटकार का नहीं हुआ कोई असर
अनुराग शर्मा सीहोर
बीजेपी की सरकार मे नहीं होती कोई भ्रष्टाचार अधिकारी के ऊपर कोई कार्यवाही आज 15 दिन बीत गए भोपाल अलोक शर्मा सांसद और सीहोर विधायक सुदेश राय की फटकार के बाद भी नहीं हुआ कोई असर आज भी जिला ई पंजीयन कार्यालय केजिलाधिकारी के प्राइवेट ड्राइवर सरकारी दफ्तर मे आईडी खोलकर बैठते नजर आये आज 15 दिन बीत गए उसके बाद भी जिला कलेक्टर की तरह से कोई कार्रवाई नहीं हुई*पंजीयक बोले हम नहीं देंगे बयान, आपका कोई काम करना हो तो मैं कर दूंगाफिर जिला पंजीयक की केबिन में बैठा मिला ड्राइवर, कैमरों को देख उठकर भागा पंजीयक विभाग के बाबू के नदारद होने पर कहा उसने भेजे हैं मीडियाकर्मी विभाग के कर्मचारी पर शंका के आधार पर किया आष्टा तबादला
मुरैना में भी रही है जिला पंजीयक की कार्यप्रणाली रही है संदिग्ध

विधायक व सांसद ने कलेक्टर के सामने पंजीयक को लगाई थी फटकार, कहा था सुधर जाओ
-वेंडरों का कहना हे कि ड्राइवर ने फोन कर मिलजुलकर काम करने को बोला था, विक्रेता को भी लगाया था फोन
-ड्राइवर रवि सोलंकी 9424943537 से कॉल लगाता है ,रजिस्ट्री कमिया बताकर बनाता है पैसों के लिए दबाव सीहोर जिला पंजीयक कार्यालय की कार्यप्रणाली पर उठ रहे ताज़ा सवालों ने प्रशासन की साख को दांव पर लगा दिया है। सूत्रों और वेंडरों के आरोपों के मुताबिक़ जिला पंजीयक कक्ष में नियमित कर्मचारी न होने के बावजूद एक कथित ड्राइवर बार-बार कार्यालय में आकर बैठकर काम करता दिखाई देता है और वेंडरों को फोन कर रजिस्ट्री में कमियां बताते हुए उनसे पैसे वसूली व मिलकर घालमेल करने का दबाव बनाता है।
इसमें प्रमुख रूप से ड्राइवर रवि सोलंकी का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। वेंडरों का कहना है कि सोलंकी अपने मोबाइल नंबर 9424943537 से काल कर रजिस्ट्री के स्टाम्प-ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन में अलग-अलग तरीकों से हेरफेर करने का दबाव डालता था। कुछ वेंडरों के लाइसेंस पहले ही निरस्त किए जा चुके हैं और खबर के अनुसार जिले में 20 से अधिक वेंडरों के लाइसेंस रद्द किए गए हैं, जिनमें हाल ही में आठ वेंडर-लाइसेंस भी शामिल बताए जा रहे हैं।

प्रभावितों में दीपक वर्मा, जसपाल गौर, अजहर सिद्दीकी, पवन सोनी, पायल गुप्ता, आफताब सिद्दकी, विमल और योगेश पाराशर के नाम मौजूद हैं।
गत दिनों जिला जनसंपर्क कार्यालय ने मामले का तत्काल खंडन जारी कर कहा था कि समाचार में दिखाए गए फोटो में बैठे व्यक्ति जिला पंजीयक प्रेमनंदन सिंह के ड्राइवर हैं, जो व्यक्तिगत कारणों से (जैसे टिफ़िन लाने) कार्यालय आते-जाते हैं और वे शासकीय कार्य नहीं करते। पंजीयक सिंह ने स्पष्ट किया कि पंजीयन कार्य संपदा-2.0 पोर्टल पर कर्मचारियों की लागइन, बायोमेट्रिक थंब डिवाइस और आइरिस स्कैन से आथेन्टिकेशन के बाद ही होता है, इसलिए कोई अन्य व्यक्ति पोर्टल पर काम नहीं कर सकता। जबकि वेंडरों का कहना है कि उक्त ड्राइवर रजिस्ट्री में कमियां बताकर अधिक ड्यूटी का क्रेता पर दबाव बनाने की बात कहकर घालमेल के लिए बोला जाता है। जब मीडियाकर्मियों ने मंगलवार को पुन: वही व्यक्ति जिला पंजीयक की केबिन में बैठे होने पर जानकारी मांगी, तो पंजीयक ने बयान देने से इनकार कर दिया, वहीं जिला पंजीयक ने कहा कि हम बयान नहीं देंगे। आपका कोई काम करना हो तो मैं कर दूंगा”। जबकि कुछ देर पहले ही कैमरा दिखाई पड़ते ही वही शख्स जिला पंजीयक कार्यालय से बाहर निकल गया, जिससे संदेह और गहरा रहा है।
वेंडरों का दर्द
वेंडरों का आरोप है कि उक्त ड्राइवर साझा साज़िश के ज़रिए क्रेता-वेंडर के बीच मनमानी और झूठे कमियों का हवाला देकर रजिस्ट्री में बदलाव करवा कर कमीशन निकालते थे। कई विक्रेताओं का कहना है कि उन्हें भी फोन करके परेशान किया गया है। हालत यह है कि असहमति या असहयोग के परिणामस्वरूप कई वेंडरों के लाइसेंस निलंबित या निरस्त कर दिए गए, जिससे वे फिलहाल बेरोजगार हो चुके हैं। प्रभावितों ने तत्काल निष्पक्ष जांच की मांग की है।
मुरैना में भी विवादित रहे हैं जिला पंजीयक
सूत्र यह भी बता रहे हैं कि मुरैना में पंजीयक कार्यालय से निजी पंजीयक कार्यालय में जब्त सरकारी दस्तावेज और सील-लगे कागजात को लेकर पहले भी शिकायतें उठ चुकी हैं। विधायक तथा सांसद स्तर पर भी पंजीयक की कार्यप्रणाली पर नाराज़गी दर्ज कराई जा चुकी है और कलेक्टर के समक्ष फटकार की खबरें मीडिया में आ चुकी हैं। खास बात तो यह है कि उक्त ड्राइवर को लेकर कुछ मामलों में विभागीय कर्मचारियों पर शंका के आधार पर स्थानांतरण भी कर दिया है।