अमरकंटक में संत मंडल की बैठक संपन्न, पूर्व वर्षों की भांति इस वर्ष भी धूमधाम से मनाया जाएगा दीपोत्सव
मनोज कुमार द्विवेदी अमरकंटक अनूपपुर
श्री गीता स्वाध्याय आश्रम में संत मंडल की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें क्षेत्र के सभी प्रमुख आश्रमों के संतों ने भाग लिया। इस बैठक में आगामी दीपोत्सव की तैयारियों पर चर्चा की गई और सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि पिछले वर्षों की तरह इस वर्ष भी अमरकंटक में दीपोत्सव का पर्व बड़े ही धूमधाम और उल्लास के साथ मनाया जाएगा।
दीपोत्सव के कार्यक्रम
– सामूहिक दीप प्रज्वलन: नर्मदा नदी के तट पर और सभी आश्रमों में लाखों दीपक जलाए जाएंगे, जिससे पूरे अमरकंटक में एक अलौकिक दृश्य उत्पन्न होगा।
भजन संध्या और सांस्कृतिक कार्यक्रम विभिन्न आश्रमों और मंदिरों में भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।
प्रवचन और सत्संग
संत-महात्माओं द्वारा दीपोत्सव के महत्व और आध्यात्मिक संदेशों पर प्रवचन दिए जाएंगे। दीपोत्सव के दौरान प्रसाद वितरित किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक आनंद मिलेगा।
दीपोत्सव का उद्देश्य
दीपोत्सव का उद्देश्य सिर्फ पर्व मनाना नहीं, बल्कि समाज में आध्यात्मिक चेतना और भाईचारे की भावना को बढ़ावा देना है। अमरकंटक संत मंडल ने सभी श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों से इस आयोजन में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आग्रह किया है।

आयोजन की तैयारी
इस आयोजन को सफल बनाने के लिए सभी आश्रमों और स्थानीय प्रशासन का सहयोग लिया जा रहा है। दीपोत्सव के दौरान सुरक्षा और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाएगा, ताकि श्रद्धालु आध्यात्मिक आनंद के साथ-साथ एक सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण का भी अनुभव कर सकें।
यह रहे उपस्थित – स्वामी नर्मदानंद जी महाराज श्री गीता स्वाध्याय आश्रम स्वामी लवलीन महाराज धारकुंडी आश्रम स्वामी नर्मदानंद जी महाराज श्री शंकराचार्य आश्रम अमरकंटक स्वामी बरखा पुरी जी महाराज कैलाश पुरी आश्रम राम नरेश शास्त्री श्री मार्कंडेय आश्रम गणेश पाण्डेय जी श्रीयंत्र आश्रम ओमप्रकाश अग्रवाल जी बाल्मीकि जैसवाल जी दिनेश साहू जी शिव खैरवार जी श्रवण उपाध्याय जी उमाशंकर पाण्डेय मुन्नू एवं अमरकंटक के सभी संत महात्मा उपस्थित रहे।
दीपोत्सव अमरकंटक की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है और इसे सफल बनाने के लिए सभी का सहयोग आवश्यक है। इस पावन पर्व में भाग लेकर श्रद्धालु आध्यात्मिक चेतना और भाईचारे की भावना को बढ़ावा देने में अपना योगदान दे सकते हैं।