चंद्र ग्रहण की सूतक से पूर्व हुए सभी धार्मिक कार्यक्रम और मंदिरों में पूजा पाठ
सी एल गौर रायसेन
रविवार को पितृ पक्ष की पूर्णिमा तिथि से पूर्वजों को तर्पण करने का कार्य शुरू हो गया है, पहले से ही सनातन धर्म प्रेमियों द्वारा जल स्रोतों पर जाकर अपने अपने पूर्वजों का ध्यान करते हुए उन्हें सम्मान के साथ आमंत्रित किया गया इसके पश्चात उनके लिए तर्पण किया एवं पूजा अर्चना भोग लगाने के बाद उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।इन दिनों में अपने पूर्वजों का तर्पण करने से परिवार में सुख समृद्धि मिलती है और पितृदेव खुश होकर आशीर्वाद देते हैं जो हमारे मानव जीवन को सार्थक बनाता है।

इन 15 दिनों में जो जातक अपने पूर्वजों की विशेष कृपा पाने के लिए उन्हें रोज तर्पण कर उनका ध्यान करते हुए उन्हें मानता है उसे किसी प्रकार की दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ता। पितृ पक्ष के दिनों का सनातन धर्म में बड़ा महत्व है। इसका पालन नियम संयम के साथ सभी को करना चाहिए। पूर्णिमा को शहर से लेकर गांव में भी तर्पण करने का कार्य श्रद्धा पूर्वक शुरू किया गया। लोगों ने अलसुबह से ही स्नान कर आस पास के जल स्रोतों एवं कुआं, बावड़ी, नदियों, तलवों पर जाकर अपने पूर्वजों के लिए जल देकर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करने का पुण्य कार्य किया। इधर वर्ष का दूसरा बड़ा चंद्र ग्रहण पड़ने के कारण लोगों ने सूतक से पूर्व ही पूजा पाठ कर लिया क्योंकि मंदिरों के पट भी ग्रहण के कारण बंद रहे रविवार की अर्ध रात्रि के बाद तक चंद्र ग्रहण पड़ने के बाद दूसरे दिन सोमवार से मंदिर खोले जाएंगे।