मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
ग्रामीण अंचलों में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव नगर में बड़े धूमधाम से हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। जिसको लेकर नगर के राधा कृष्ण मंदिर सहित अन्य मंदिरों में पहले तैयारियां पूर्ण कर ली गईंथी । श्रीकृष्ण के पवित्र त्योहार जन्माष्टमी को राधा कृष्ण मंदिरों में भक्तों द्वारा भजन कीर्तन पूजा पाठ का आयोजन किया गया। रात के जैसे ही 12 बजे खेड़ापति हनुमान मंदिर ,गुरुद्वारा मंदिर, राम जानकी मंदिर, इच्छापूर्ति हनुमान मंदिर दीवानगंज, अयोध्या धाम मंदिर, गणेश मंदिर ,साहू मंदिर अंबाड़ी, शिव पार्वती मंदिर अंबाडी और रेलवे स्टेशन सेमरा मंदिर, गायत्री मंदिर सेमरा में आरती होने लगी। इससे पहले मंदिरों में सुंदरकांड का आयोजन रखा गया। भगवान श्री कृष्ण का पूजन व आरती हुईं, आरती के बाद आतिशबाजी की गई जिसके बाद भक्तों को प्रसाद वितरण किया गया। हिंदू धर्म में जन्माष्टमी के त्योहार का विशेष महत्व है। कृष्ण जन्माष्टमी के दिन भगवान श्री कृष्ण के बाल रूप की विधि विधान से पूजा की जाती है। कई घरों में छोटे-छोटे बच्चों को राधा कृष्ण की तरह सजाया गया। और उनकी आरती की गई।
भाद्रपद महीने में कई त्योहार आते हैं। इन त्योहारों में एक जन्माष्टमी है। जन्माष्टमी हिंदू धर्म में मनाया जाने वाला सबसे पवित्र त्योहारों में से एक है। हिंदू धर्म में इसका विशेष महत्व है। पुराणों के अनुसार भगवान श्री कृष्ण ने भाद्रपद माह में ही रोहिणी नक्षत्र में जन्म लिया था। हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल जन्माष्टमी का त्योहार शुक्रवार को मनाया गया। कृष्ण जन्माष्टमी के दिन भगवान श्री कृष्ण के बाल रूप की विधि विधान से पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि भगवान श्री कृष्ण के जन्म दिवस के दिन विधि विधान से पूजा करने व् दिन भर व्रत धारण कर श्रीकृष्ण का स्मरण करना अत्यंत फलदाई होता है। शास्त्रों में जन्माष्ठमी के व्रत को व्रतराज कहा गया है। भविष्य पुराण में इस व्रत के सन्दर्भ में उल्लेख है कि जिस घर में यह देवकी-व्रत किया जाता है वहां अकाल मृत्यु,गर्भपात,वैधव्य,दुर्भाग्य तथा कलह नहीं होती। जो एक बार भी इस व्रत को करता है वह संसार के सभी सुखों को भोगकर विष्णुलोक में निवास करता है।