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उदयपुरा में रिटायर्ड शिक्षक तो देवरी में एक युवक को नकली पुलिस बनकर दो बाइक सवारों ने लुटा

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– मामले की शिकायत उदयपुरा और देवरी थाने में दर्ज

रायसेन। अमूनन शांत रहने वाले रायसेन जिले में अब अपराधियों के हौसले बुलंद होते जा रहे हे। यहां दो युवकों ने निकली खुफिया पुलिस कर्मी बनकर एक रिटायर्ड शिक्षक और एक युवक को अपनां शिकार बनाया।दोनों घटनाएं अलग अलग स्थानों पर हुई लेकिन दोनों बारदातों का तरीका एक ही था।
जानकारी के अनुसार 03 अगस्त की शाम को उदयपुरा में एक रिटायर्ड शिक्षक श्री कोमल प्रसाद जी शास्त्री के साथ लूट की घटना को दो अनजान युवकों ने अंजाम दिया । जिसकी रिपोर्ट फरियादी द्वारा उदयपुरा थाने में दर्ज कराई गई है ।
प्राप्त जानकारी के अनुसार रिटायर्ड शिक्षक कोमल प्रसाद शास्त्री शाम को एक कार्यक्रम से वापस लौट रहे थे तभी दो युवकों ने रास्ता रोककर अपने आप को खुफिया पुलिस बताया और 70 हजार रूपये कीमत की सोने की अँगूठी को लूटकर चले गए । इसी प्रकार की वारदात दोपहर में थाना देवरी के अंतर्गत भी हुई है फरियादी ने देवरी घटना के फुटेज देखकर लुटेरों को पहचान लिया है दोनों वारदातों में लूट की घटना में बहुत सारी समानताएं सामने आई हैं

पीड़ित अनुज जैन के अनुसार वह अपने दोस्त राजेश साहू के साथ आस्तिक वेयरहाउस अपना ट्रैक्टर लेने जा रहे थे। शाम करीब 5 बजे, थाना मोड़ पर अचानक एक मोटरसाइकिल पर सवार दो लोग आए और उन्हें रोक लिया। उन्होंने खुद को पुलिस वाला बताते हुए कहा कि “हम पुलिस से हैं और आगे एक बहुत बड़ी चोरी हो गई है।”

इसके बाद उन्होंने अनुज को धमकाते हुए कहा कि “आपने जो सोने की अंगूठी पहनी हुई है, उसे उतार कर जेब में रख लीजिए।” अनुज ने बताया कि उन्होंने देखा कि पीछे से एक और गाड़ी आई, जिसमें सवार व्यक्ति ने अपनी सोने की चेन और अंगूठी उतारकर उन दोनों लड़कों को दे दी। यह देखकर डर के मारे अनुज ने भी अपनी सोने की अंगूठी, जिसकी कीमत लगभग ₹30,000 थी, उन्हें दे दी।
“हम गुप्त पुलिस वाले हैं, वर्दी नहीं पहनते” अनुज ने सोचा कि वाकई ये पुलिस वाले होंगे। जब उन्होंने पूछा कि “आप वर्दी क्यों नहीं पहने हुए हैं?”, तो ठगों ने जवाब दिया, “हम गुप्त पुलिस का काम कर रहे हैं, इसलिए वर्दी नहीं पहनते। हम जितना कह रहे हैं, उतना कर दीजिए नहीं तो आपका गाड़ी का लाइसेंस, कागज और गाड़ी किसके नाम है – सारे कागज दिखाइए।” इस डर के मारे अनुज ने भी अपनी अंगूठी उन्हें सौंप दी।

ठगों ने चालाकी से अंगूठी को एक कागज में लपेटकर अनुज को वापस दे दिया और कहा कि “इसको ऐसे नहीं, एक कागज में लपेटकर रखना है।” उनके जाते ही जब अनुज ने कागज खोलकर देखा, तो उसमें अंगूठी की जगह सिर्फ एक पत्थर रखा हुआ था। तब उसे एहसास हुआ कि वह लूट का शिकार हो गया है।

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