“नशे और अपराध से दूर युवाओं ने चुनी जनसेवा की राह, सुविधाओं की कमी को बनाया अपनी ताकत
धीरज जॉनसन, दमोह
दमोह जिले के एक छोटे से गांव चिरई ने यह सिद्ध कर दिया है कि सपने बड़े हों तो गांव की सीमाएं मायने नहीं रखतीं। शहर से करीब 30 किलोमीटर दूर स्थित यह गांव जनसंख्या में भले ही सीमित है, लगभग 250 लोग, लेकिन उपलब्धियों के लिहाज़ से यह किसी भी बड़े गांव या कस्बे को पीछे छोड़ चुका है।
मुख्य आजीविका: परिश्रम और परंपरा का संगम
यहां के अधिकतर लोग खेती और पशुपालन जैसे परंपरागत कार्यों से जुड़े हुए हैं। पानी के स्रोत के रूप में कुएं और हैंडपंप ही मौजूद हैं। गांव में एकमात्र प्राथमिक विद्यालय है, और स्वास्थ्य केंद्र भी लगभग 4 किलोमीटर दूर स्थित है। इसके बावजूद, इस गांव के युवाओं में शिक्षा के प्रति जो जुनून और आत्मविश्वास है, वह किसी बड़े शहर के पढ़े-लिखे युवाओं को भी प्रेरित कर सकता है।

विकास की पहचान: सरकारी सेवाओं में मजबूत उपस्थिति
इस छोटे से गांव से अब तक 14 लोग विभिन्न सरकारी सेवाओं में पहुंच चुके हैं। यह आंकड़ा न केवल आश्चर्यचकित करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कड़ी मेहनत, सही मार्गदर्शन और इच्छाशक्ति से हर बाधा पार की जा सकती है।
सेवानिवृत्त अधिकारी:
पर्वत यादव — बैंक मैनेजर
सूरत सिंह — वन विभाग में रेंजर
मदन सिंह — पीडब्ल्यूडी विभाग में एसडीओ
वर्तमान में कार्यरत:
रज्जन सिंह — पंचायत सचिव
भरत सिंह — वन विभाग में दरोगा
इंद्रकुमार यादव — शिक्षक (वर्ग-2)
कल्याण सिंह — वन विभाग में सिपाही
दयालु ठाकुर — नगरपालिका नियमित कर्मचारी, दमोह
डॉ. महेश —(एमबीबीएस) ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर, बटियागढ़
डॉ.महेश सिंह —(एमबीबीएस) जिला चिकित्सालय
रूपेश सिंह —आरक्षक, मप्र पुलिस
जीवन सिंह — आरक्षक, दिल्ली पुलिस
प्रेमबाई ठाकुर — आंगनबाड़ी कार्यकर्ता
नीति ठाकुर — आशा कार्यकर्ता

सकारात्मक संस्कृति: नशे से दूरी
सेवा की भावना
गांव चिरई की सबसे बड़ी ताकत है यहां के युवाओं में नशे और अपराध से दूरी बनाए रखना और राष्ट्र सेवा का भाव। यही आदर्श मानसिकता इस गांव को बाकी इलाकों से अलग प्रदर्शित करता है।गांव के छोटे से मैदान में भी बच्चों को खेलते और शारीरिक अभ्यास करते देखा गया है। बताया गया कि गांव में पहुंचे अनजान व्यक्तियों के साथ भी इनका व्यवहार मधुर रहा है।

अन्य गांवों के लिए आदर्श
ग्राम चिरई अब अन्य ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक आदर्श बनकर उभरा है। यदि इस गांव को शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन जैसी मूलभूत सुविधाओं का थोड़ा और सहयोग मिले, तो यह आने वाले वर्षों में और भी बड़ी मिसाल बन सकता है।