– बारहवीं के बाद मर्चेंट नेवी की राह पकड़ी, एक साल में 10 देशों की यात्रा
धीरज जॉनसन, दमोह
“अगर सीखने और कुछ हासिल करने की सच्ची इच्छा हो, तो इंसान बेहतर कर सकता है। यदि मन में लगन न हो, तो घरवाले चाहे कितनी भी सुविधाएं दे दें, कुछ नहीं हो सकता।” — यह कहना है दमोह शहर के वार्ड नंबर 10 निवासी ओम शर्मा का, जिन्होंने केंद्रीय विद्यालय से गणित विषय में 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद मर्चेंट नेवी को करियर के रूप में चुना और एक साल में दुनिया के दस देशों का सफर कर लिया।

बारहवीं के बाद मर्चेंट नेवी में तलाशा करियर
23 वर्षीय ओम शर्मा ने बताया कि वर्ष 2021 में 12वीं के बाद उन्होंने नौकरी की तलाश शुरू कर दी। इंटरनेट पर सर्च करने के दौरान उन्हें मर्चेंट नेवी में करियर बनाने का अवसर दिखाई दिया, जिसके लिए न्यूनतम योग्यता 12वीं (गणित विषय सहित) थी। उन्होंने ऑनलाइन आवेदन किया और दिल्ली में इंडियन मेरीटाइम यूनिवर्सिटी के माध्यम से डीजी शिपिंग के अंतर्गत आयोजित कॉमन एंट्रेंस टेस्ट, साक्षात्कार, साइकोमेट्रिक और मेडिकल टेस्ट में भाग लिया।

इसके बाद उन्हें मुंबई स्थित एंग्लो ईस्टर्न मेरीटाइम एकेडमी में एक वर्षीय ट्रेनिंग के लिए चुना गया। इस दौरान उन्होंने इंजन और नेविगेशन विभाग, शिप संचालन, कार्गो प्रबंधन, स्थायित्व, संग्रहण आदि का गहन प्रशिक्षण प्राप्त किया। अब तक वे दो बार 6-6 माह के कॉन्ट्रैक्ट पर समुद्री सफर कर चुके हैं साथ ही डीएनएस लीडिंग टू बीएससी नॉटिकल साइंस की योग्यता भी प्राप्त कर ली।
बैंक से मिला एजुकेशनल लोन, ट्रेनिंग के बाद चुकाने की छूट
ओम ने बताया कि ट्रेनिंग के दौरान लगभग ₹8 लाख की फीस स्वयं वहन करनी होती है, जिसे उन्होंने बैंक से एजुकेशन लोन लेकर पूरा किया। इस प्रक्रिया में कंपनी ने उन्हें जरूरी दस्तावेज और मार्गदर्शन प्रदान किया। ट्रेनिंग पूर्ण होने के एक वर्ष के भीतर नौकरी शुरू होने पर लोन चुकाने का समय मिलता है।

अब तक देखे 10 देश, नई संस्कृतियों का अनुभव
ओम के अनुसार मर्चेंट नेवी की नौकरी में उन्हें दुनिया देखने का अवसर मिला है। पहली यात्रा में वे ब्राजील गए, जहाँ से अर्जेंटीना, मिस्र, अमेरिका और जिब्राल्टर जैसे देशों में कार्य किया। दूसरी बार उन्होंने नॉर्वे (ओस्लो), अमेरिका (टेक्सास), फ्रांस, नीदरलैंड होते हुए फिर नॉर्वे से वापसी की।

समुद्री सेवा में अनुशासन और जिम्मेदारी अनिवार्य
ओम ने बताया कि इस क्षेत्र में एक छोटी सी गलती भी बड़ा नुकसान कर सकती है, इसलिए हर छोटी-बड़ी जानकारी तुरंत डेक कैडेट को देनी होती है। उनके अनुसार, तीन 6-6 माह के सफल कॉन्ट्रैक्ट पूरे होने के बाद उन्हें लाइसेंस मिलेगा और सेलरी में वृद्धि होगी। वर्तमान में वे डेक कैडेट के रूप में कार्यरत हैं और कार्गो लोडिंग, रिपोर्टिंग, व जहाज की स्थिति की निगरानी जैसी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। जहां थर्ड ऑफिसर, सेकेंड ऑफिसर, चीफ ऑफिसर और कैप्टन तक पहुंच सकते है।
यूरोप से मिली सीख: पर्यावरण के प्रति सजगता
भ्रमण के दौरान ओम ने महसूस किया कि यूरोपीय देश पर्यावरण संरक्षण को लेकर अत्यधिक सजग हैं। उन्होंने बताया कि नॉर्वे और नीदरलैंड जैसे सम्पन्न देशों में लोगों के पास महंगी कारें होने के बावजूद वे पर्यावरण की सुरक्षा हेतु साइकिल चलाना पसंद करते हैं। वहां के लोग तनाव मुक्त रहते हुए अनुशासन और परफेक्शन से काम करते हैं।
ओम शर्मा की यह सफलता की कहानी न सिर्फ युवाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत है, बल्कि यह भी दिखाती है कि इच्छाशक्ति, योजना और मेहनत से कोई भी अपने सपनों को साकार कर सकता है।