भगवान केवल सच्चे भाव के भूखे है – वेदाचार्य महाराज
सैयद मसूद अली पटेल गैरतगंज रायसेन
भगवान केवल भाव के भूखे हैं जो भी भगत भगवान को भाव से पुकारता है भगवान उनके घर दौड़े चले आते हैं जिस प्रकार विदुर जी ने भगवान को भाव से पुकारा तो भगवान उनके घर पहुंच गए और उनके घर केले के छिलके खाए। भगवान कभी भी किसी की वस्तु को नहीं देखते भगवान केवल भक्तों के भाव को देखते हैं।
यह भगवत कथा तहसील क्षेत्र के ग्राम खमरियागंज में बीते सात दिनों से चल रही सप्त दिवसीय श्रीमद् भागवत महापुराण कथा के आयोजन में वेदाचार्य महाराज वीकलपुर ने कथा वाचन में कही। तहसील क्षेत्र के ग्राम खमरियागंज के श्रीराम मंदिर परिसर में बीते 8 अप्रैल से प्रथम वर्ष संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन सोमवार को पूर्णाहुति के साथ समापन हो गया। किया जा रहा है। इसके पूर्व अंतिम दिवस की कथा में व्यासपीठ पंडित श्री वेदाचार्य महाराज वीकलपुर ने कहा कि भावना में भाव नहीं तो भावना बेकार है और भावना में भाव है तो भव से बेड़ा पार हे भगवान की भक्ति करने की कोई उम्र नहीं होती जैसे ध्रुव जी की आयु 5 वर्ष की थी जब उन्होंने भगवान की भक्ति की तो स्वयं भगवान उनको दर्शन देने के लिए गए। भगवान को पाने की तीन सीढ़ियां है श्रद्धा, विश्वास और समर्पण। इसी प्रकार मनुष्य के बिगड़ने के चार साधन है पहला सुंदर रूप का होना, दूसरा युवावस्था का होना, तीसरा ज्यादा संपत्ति का होना और चौथा ऊंचा पद मिल जाना। इन चारों चीजों के साथ यदि विवेक नहीं है तो निश्चित रूप से वह व्यक्ति अनर्थ किए बिना नहीं रह सकता यदि विवेक है तो यह चारों चीजें भी व्यक्ति का कुछ नहीं बिगाड़ सकती। उन्होंने बताया कि जो विवेक है वह सत्संग से प्राप्त होता है इसलिए व्यक्ति को संतो का संग करना चाहिए। वेदाचार्य महाराज ने बताया कि कलयुग में भव से पार उतरने के लिए सत्संग करना जरूरी है। सत्संग का मतलब ढोलक चिमटा बजाना नहीं है। सत्संग का मतलब सत्य पर चलना सत्य का साथ देना और पूरे परिवार को जोड़ कर रखना है। हर रोज अपने परिवार के साथ के साथ सत्संग करना चाहिए। पूरे परिवार को इकट्ठा करके विचार करना चाहिए आज दिन में हमने क्या गलती की और उन गलतियों को अगले दिन सुधारना चाहिए। इसी का नाम सत्संग है। महाराज ने भक्त प्रहलाद के जीवन चरित्र पर प्रकाश डाला और भक्तों को बताया कि अपने जीवन में प्रहलाद की तरह भक्ति करनी चाहिए। श्रीमद्भागवत कथा को श्रवण करने बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। पूर्णाहुति के बाद परिसर में महाप्रसादी वितरण, कन्या भोज एवं भंडारे का आयोजन हुआ।