अनुराग शर्मा सीहोर
शहर की जीवन दायिनी सीवन नदी को संवारने के लिए शहर के युवा डॉक्टर गगन नामदेव ने प्रण लिया है। युवा डॉक्टर नामदेव के इस प्रण में शहर का भी साथ मिल रहा है। अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा स्वयं भी सीवन नदी में गहरीकरण के लिए श्रमदान करेंगे।
सीवन को संवारने के लिए डॉ. गगन नामदेव ने शहरवासियों से अपील की थी, उनकी अपील का असर यह रहा कि एक-एक कर सभी सामाजिक-राजनीतिक संगठनों ने सीवन में श्रमदान के लिए अपनी सहमति दी। सीवन को संवारने के लिए समिति का गठन किया, जिसे नाम दिया गया सीवन उद्धार समिति।
डॉ. गगन नामदेव ने बताया कि आगामी दिनों में बारिश से पहले जनता के सहयोग के अलावा दो दर्जन से अधिक समाजेसवी संगठन, संस्था और समितियां सभी मिलकर सीवन नदी के गहरीकरण कार्य में लगेंगी। हमारे पवित्र उद्देश्य का मतलब है सीवन को जीवन बचाना है। शहर के लोगों की जिंदगी से जुड़ी सीवन नदी लगातार अपनी जीवंतता खो रही है। साल दर साल बदहाल होती चली जा रही है। नगरीय क्षेत्र के करीब 8 किलोमीटर लंबे हिस्से से गुजरने वाली सीवन तटीय इलाकों के बड़े भाग का भू.जल स्तर बनाए रखती है।
शहर के लिए किसी वरदान से कम नहीं
डॉ. गगन नामदेव ने बताया कि शहर के बीच से गुजरी नदी आंखों को सुकून देने के साथ ही पानी की हमारी जरूरतों को पूरा करती है। इसके बावजूद हर साल बारिश के पानी के साथ आने वाली मिट्टी धीरे-धीरे गाद बनकर नदी की गहराई कम कर रही है। उथली होती नदी में जलभराव की मात्रा लगातार कम होती चली जा रही है। मानसूनी सीजन की कम होती बारिश को देखते हुए अब नदी का संरक्षण बहुत बड़ी जरूरत बन चुका है।
यहां से शुरू हुई सीवन
जीवनदायिनी सीवन नदी सैकड़ाखेड़ी के पास स्थित फोरलेन बायपास पर बने पुल से शुरु होती है जो गणेश मंदिर के पास करबला पुल से होकर गुजरती है। यह नदी पार्वती नदी में जाकर मिलती है। सीवन नदी की नगरीय क्षेत्र में कुल लंबाई 8 किमी है। इस हिस्से में दोनों और सघन आबादी निवास करती है। नदी के ऊपर नगरीय क्षेत्र में 7 पुल हैं। नदी में लबालब पानी भरा रहने से आसपास के जलस्रोत रिचार्ज होते हैं। नदी का जलस्तर बना रहने से करीब 2000 निजी बोर के अलावा हैंडपंप और कई कुएं रिचार्ज होते हैं।