-कभी अपने आप को यह ना माने की सिर्फ मैं ही ज्ञानी हूं – न्यायाधीश श्री शुक्ला
शरद शर्मा बेगमगंज,रायसेन
न्यायधीश को कभी यह नहीं मानना चाहिए कि मै ही ज्ञानी हूं। आपसे भी अधिक ज्ञानी और अनुभवी लोग मौजूद हैं जिनसे भी मार्गदर्शन मिलता है। मै यहां सिनीयर था और मेरे साथी न्यायाधीशगण मुझसे छोटे रहे, लेकिन मैंने हमेशा उनसे भी विचार विमर्श किया और हमेशा सामुहिक निर्णय दिए हैं। न्यायपालिका से लोगों को बहुत अपेक्षाएं हैं इसलिए न्यायाधीश को उनकी अपेक्षाओं पर खरा उतरना चाहिए।
यह बात प्रथम अपरसत्र एवं जिला न्यायाधीश श्री आशुतोष शुक्ला ने विदाई समारोह के दौरान अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए कहा। साथ ही उन्होंने बताया कि न्यायाधीश को अच्छा बनाने में अधिवक्तासंघ की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। क्योंकि आप लोगों के साथ रहकर जो माहौल बनता है वही न्यायाधीश को अच्छा और बुरा बनाता है।
यहां बहुत प्यार मिला है और एक परिवार की तरह रहा हूं।जब कभी आप लोग बुलाएंगे में आता रहूंगा। कुछ मजबूरियों की बजह से जाना पड़ रहा है नहीं तो मैं यहां से नहीं जाता।
वहीं द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश श्री सचिन द्विवेदी ने कहा कि समाज की परिस्थितियों को समझे बिना न्याय नहीं किया जा सकता, ज्ञान के द्वारा ही समाज को समझा जा सकता है उसी से निर्णय लिया जाता है। श्री शुक्ला जी के पास ज्ञान का भंडार है और ज्ञान प्रकाश का रूप होता है, तो उनसे हमें बहुत ज्ञान मिला और आगे भी मिलता रहेगा।
व्यवहार न्यायाधीश वर्ग 1 श्री निशांत मिश्रा ने कहा कि श्री शुक्ला जी मुखिया के रूप में रहे जिससे पारिवारिक माहौल बना रहा उन्होंने छोटे भाई की तरह सम्मान दिया और उनके बड़प्पन से बहुत कुछ सीखने मिला है। जो उनका सरल स्वभाव है इतना सरल होना बहुत कठिन होता है।
व्यवहार न्यायाधीश वर्ग 2 कु. स्वेता चौहान ने कहा कि जिस तरह परिवार का मुखिया होता है उसकी परिवार में महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उसी तरह श्री शुक्ला जी ने बहुत चीजों को सम्हाला है और उनसे हमेशा मार्गदर्शन मिलता रहा है। इतना सहज- सरल व्यवहार व्यक्ति बहुत कम है जो शायद अब मिले।
वहीं अधिवक्ता संघ अध्यक्ष संतोष प्रभाकर सिंह बुंदेला ने संबोधित करते हुए कहा कि
उगते सूरज को तो सभी प्रणाम करते हैं, हमारे देश में एक त्योहार मनाया जाता जो डूबते सूरज को प्रणाम करते हैं अर्ध्य देते हैं। न्यायाधीश श्री शुक्ला जी के जाने पर भी आपको प्रणाम करते हैं। क्योंकि आपके व्यवहार और समझ से न्यायालय का सभी अधिवक्ताओं के साथ पारिवारिक माहौल रखा।

कार्यक्रम को एसडीएम सौरभ मिश्रा, एजीपी धीरेंद्र सिंह गौर, वरिष्ठ अधिवक्ता एनके जैन, मतीन सिद्धकी, आरके गुप्ता, ओपी दुबे, चांद मियां, आईएस बुंदेला, श्रीकृष्ण तिवारी, बजीर खान, आरएन रावत ने संबोधित करते हुए अपने विचार रखे और सभी ने उन्हें रोकने के लिए अपने- अपने प्रयास से आग्रह किया एवं शेर- शायरियों के माध्यम से भावभीनी विदाई दी। वहीं एड.अमोघ शर्मा ने मिमिक्री के माध्यम से और चुटकुले सुनाकर लोगों को हंसी के ठहाके और तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। कार्यक्रम का संचालन एड. अभिनव मुंशी और आभार एड. राजकुमार खरे ने व्यक्त किया।
न्यायालय में पदस्थ मुख्य न्यायाधीश श्री आशुतोष शुक्ला का बेगमगंज से भोपाल स्थानांतरण होने पर अधिवक्ता संघ द्वारा विदाई समारोह आयोजित किया गया। सभी अधिवक्ताओं ने श्री शुक्ला का हार माला पहनाकर सम्मान किया। वहीं अधिवक्ता संघ द्वारा शाल श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।
कार्यक्रम में तहसीलदार एसआर देशमुख, एड.ओपी त्रिवेदी, श्याम रावत, डीपी चौबे, किशोरी लाल चौरसिया, पीडी नेमा, राजेन्द्र सिंह सोलंकी, विनय ठाकुर, राजबहादुर सिंह, गुफरान अली, गजेन्द्र ठाकुर, संतोष घावरिया, शैलेष जैन, राघवेन्द्र यादव, राहुल तिवारी सहित समस्त अधिवक्तागण एवं न्यायालीन कर्मचारीगण मौजूद रहे।