यशवंत सराठे बरेली रायसेन
हरियाली की आन-बान-शान हरे-भरे वृक्षों से आखिर क्या दुश्मनी जो अपने-अपने स्वार्थ साधने के लिये इनको समूल नष्ट किया जा रहा है जी हां नगर के प्रसिद्ध नाहर वगीचा जहां आंवला,आम,संतरे,नींबू,एवं अन्य फलों के हरे-भरे वृक्ष नगर के लिये शोभायमान तोते ही साथ ही स्वास्थ्य लाभ के लिए हितकारी थे इस वगीचे के फल नगर ही नहीं शहरों में सप्लाई किये जाते थे ।

22 एकड़ में फैले इस बगीचे पर कालोनाइजर की ऐसी नज़र लगी कि उसे उजाड़ ही कर डाला। ठीक नगरपरिषद से सटे इस हरे-भरे वृक्षों के वगीचे को काटकर समतलीकरण कर दिया गया शेष वृक्षों को उनकी जड़ों में सुखाने वाला केमिकल डालने की तैयारी है ताकी वृक्ष सूखे तो उन्हें काटा जा सके लगभग एक माह पूर्व हरे-भरे वृक्षों के काटे जाने का समाचार देख कर तहसीलदार बरेली द्वारा कटे हुए वासों की जब्ती की कार्यवाही की गयी थी उसके वावजूद भी बांसों को काटकर उन्हें जलाया जा रहा है।

कटे ठूंठ चिन्ह को समाप्त किया जा रहा है। यह सब कालोनाइजर द्वारा कालोनी निर्माण हेतु मिली-भगत से किया जा रहा है।नगर में चर्चा का विषय वना हुआ है।भारी-भरकम लेन-देन की चर्चाओं का विषय वना हुआ है।