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बेगमगंज न्यायालय परिसर में ई-सेवा केन्द्रों सहित विभिन्न कार्यो का हुआ लोकार्पण

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शरद शर्मा बेगमगंज रायसेन

बेगमगंज न्यायालय परिसर में सुबह 11 बजे माननीय श्री न्यायमूर्ति विनय सराफ न्यायाधिपति, मप्र उच्च न्यायालय जबलपुर द्वारा मीडिएशन सेंटर भवन, तहसील विधिक सेवा समिति बेगमगंज के द्वारा न्यायालय परिसर में ई-सेवा केन्द्रों तथा मध्यस्थता सेंटर का लोकार्पण किया गया।
न्यायमूर्ति द्वारा जिला रायसेन न्यायालय एवं बेगमगंज न्यायालय में नवनिर्मित ई-सेवा केन्द्र का लोकार्पण भौतिक रूप से व नव निर्मित मीडिएशन सेंटर, ई-सेवा केन्द्रों का लोकार्पण जिला न्यायालय परिसर से ही वर्चुअल मोड से किया गया। यह कार्यक्रम माननीय प्रधान जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के मार्गदर्शन एवं अध्यक्षता में आयोजित किया हुआ।
मीडिएशन सेंटर भवन एवं ई-सेवा केन्द्र बेगमगंज का लोकार्पण वर्चुअल मोड के माध्यम से माननीय श्री न्यायमूर्ति विनय सराफ न्यायाधिपति, म.प्र. उच्च न्यायालय, जबलपुर द्वारा एवं जिला एवं सत्र न्यायाधीश वर्ग 1 एवं विधिक सेवा समिति अध्यक्ष श्री आशुतोष शुक्ल, न्यायाधीश श्री सचिन द्विवेदी, न्यायाधीश श्री निशांत मिश्रा एवं न्यायाधीश कु. स्वेता चौहान , एसडीएम सौरभ मिश्रा एवं अधिवक्ता संघ अध्यक्ष संतोष प्रभाकर बुंदेला, शासकीय अधिवक्ता धीरेन्द्र गौर, तहसीलदार एसआर देशमुख, जनपद सीईओ आशीष जोशी, नपा सीएमओ कृष्णकांत शर्मा, बीएमओ डॉ सचिन तोमर की उपस्थिति में लोकार्पण किया गया।

मध्यस्थता एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें एक निरपेक्ष मध्यस्थ, वादी और प्रतिवादी को आपसी समझ और सम्मति से अपने झगड़े को सुलझाने में मदद करता है. यह प्रक्रिया गोपनीय और ऐच्छिक होती है. इसमें भाग लेने का मौका मिलता है और सभी पक्षों को अपनी बात कहने का मौका मिलता है.

मध्यस्थता के फ़ायदे:
यह प्रक्रिया गोपनीय और सरल होती है.इसमें मुकदमे की ज़रूरत नहीं होती.इसमें समय और पैसे की बचत होती है.
यह प्रक्रिया पारस्परिक संपर्क और बातचीत को बेहतर बनाती है.इससे रिश्ते फिर से जुड़ते हैं.समझौते पर हस्ताक्षर करके सभी पक्ष अपेक्षा से ज़्यादा फ़ायदा पा सकते हैं.

अक्सर आपसी वैर और द्वेष अविश्वास और अनबन पैदा कर देते हैं। लेकिन जब मध्यस्थता के दौरान सभी पक्ष आमने – सामने बैठकर बातचीत करते हैं तो मन की गांठे खुलने लगती हैं। चूंकि मध्यस्थता औपचारिक नियमों में बंधी हुई प्रक्रिया नहीं है, सभी पक्ष अपने दिल की बात खुल कर कह सकते हैँ। ये बातें आधिकारिक व औपचारिक सीमाओं से मुक्त होती हैं। इसलिए एक लिखित समझौता भविष्य में होने वाले मनमुटाव से सभी पक्षों को बचाने और झगडे़ को जड़ से मिटाने का उत्तम साधन है ।

इस लोकार्पण कार्यक्रम में समस्त न्यायिक अधिकारी, समस्त प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी, अधिवक्तागण, कर्मचारीगण, पक्षकारगण आदि उपस्थित रहे।

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