मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
दीवानगंज, अंबाडी, सेमरा,सहित आसपास ग्रामीण क्षेत्र में गोवर्धन पूजा बड़े धूमधाम से मनाई गई। देर रात तक क्षेत्र में पटाखे की आवाज गूंजती रही। क्षेत्र में ज्यादातर ग्रामीण गोवर्धन पूजा पर ही अपने काम में आने वाली मशीनरी और ट्रैक्टर ट्राली सहित कई समानों की पूजा पाठ करते हैं। सुबह से लेकर शाम तक हर घर में गोवर्धन की पूजा की जाती है। घर की महिलाएं अपने आंगन में गोवर्धन बनाया जाता है और सजाया जाता है। पूजा पाठ की जाती है।
सुरेश साहू, अनिल साहू, संदीप नायक, मनमोहन साहू, पवन प्रजापति ,निवास मीणा, विक्रम मीणा सहित कई गांव के ग्रामीणों को कहना है कि गोवर्धन पूजा की परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है। एक समय में बृजवासी उत्तम पकवान बना रहे थे और किसी पूजा की तैयारी में जुटे थे
श्री कृष्ण ने बड़े भोलेपन से मईया यशोदा से प्रश्न किया। मईया ये आप लोग किनकी पूजा की तैयारी कर रहे हैं। कृष्ण की बातें सुनकर मैया बोली लल्ला हम देवराज इन्द्र की पूजा के लिए अन्नकूट की तैयारी कर रहे हैं। मैया के ऐसा कहने पर श्री कृष्ण बोले मैया हम इन्द्र की पूजा क्यों करते हैं। मईया ने कहा वह वर्षा करते हैं जिससे अन्न की पैदावार होती है। उनसे हमारी गायों को चारा मिलता है। भगवान श्री कृष्ण बोले हमें तो गोर्वधन पर्वत की पूजा करनी चाहिए क्योंकि हमारी गाय वहीं चरती हैं। इस दृष्टि से गोर्वधन यह पर्वत ही पूजनीय है और इन्द्र तो कभी दर्शन भी नहीं देते व पूजा न करने पर क्रोधित भी होते हैं। अत: ऐसे अहंकारी की पूजा नहीं करनी चाहिए। श्री कृष्ण के कहने पर ग्रामीणों ने इन्द्र के बदले गोवर्धन पर्वत की पूजा की। देवराज इन्द्र ने इसे अपना अपमान समझा और मूसलाधार वर्षा शुरू कर दी। इसके बाद श्रीकृष्ण ने अपनी ऊंगली पर गोवर्धन पर्वत को उठा कर उनका घमंड को तोड़ दिया था।
गौ पालकों ने अपनी पशुओं को सजा कर पूजा अर्चना की। उसी दिन से गौ पालक किसानों द्वारा परम्परागत ढंग से पूरी रस्म रिवाज के साथ यह पर्व मनाया जा रहा है। इस अवसर पर गौ पालक किसानों द्वारा अपने-अपने पशुओं को रंग बिरंगे डोरियो में घुंघरू, मूंगा का माला बनाकर माल- मवेशियों को नहला-धुलाकर पहनाया जाता है। सींग और शरीर में घी तेल सिंदूर को लगाया जाता है।