जबलपुर-नरसिंहपुर की सीमा पर प्राचीन किले के अवशेष और खूबसूरत बावड़ी भी है मौजूद
धीरज जॉनसन की रिपोर्ट
मप्र के दमोह जिले में प्राकृतिक सुंदरता के साथ पुरातात्विक महत्व के स्थल, जल स्रोत के प्राचीन साधन,नक्काशीदार बावड़ियां भी मौजूद है परंतु कहीं कहीं आज भी चट्टानों से आता हुआ पानी ग्रामीणों की प्यास बुझा रहा है।

चट्टान की झिर से भरते है पानी
जिला मुख्यालय से लगभग 90 किमी दूर जबलपुर- नरसिंहपुर सीमा के समीप के ग्राम खारी में पानी के साधन हैंडपंप मौजूद है पर उनमें से निकलने वाले पानी में पीलापन होने के कारण ग्रामीण यहां का पानी नहीं पीते है पर पास की चट्टान से झिर झिर कर निकलने वाले पानी को लोटे की सहायता से डिब्बों में भरते रहते है जबकि इसमें इनका काफी समय खर्च हो जाता है। गांव के सिब्बू,रमेश,मुन्ना ने बताया कि वर्षो से इस चट्टान की दरार से पानी रिसता रहता है और छोटे से कुंड में जमा होता रहता है उसे ही भरते है यह पानी बहुत साफ भी है गांव में लगे हैंडपंप के पानी में जंग आती है और कुछ देर रख देने के बाद उसका रंग बदल जाता है और पीलापन आ जाता है इसलिए गांव वाले यही से पानी भरते है।

प्राचीन किले के अवशेष और खूबसूरत बावड़ी
जिले में पुरातात्विक धरोहर काफी मात्रा में है जिनके से कुछ संरक्षित भी है।यहां के सुदूर अंचलों में रॉक पेंटिंग्स,किले बावड़ी,नक्काशीदार कलाकृतियां भी दिखाई देती है।

कुछ इसी तरह की खूबसूरत नक्काशीदार आकृतियां बनी बावड़ी, जिनसे लोग आज भी पानी भरते है, और कुछ दूरी पर दो किले के अवशेष जबलपुर- नरसिंहपुर की सीमा से लगे हुए ग्राम खारी देवरी और इसके समीप के जंगल में दिखाई देते है जिन्हे देखकर लगता है कि प्राचीनकाल में राजाओं ने अपने निवास के लिए किले बनाने के साथ साथ जल स्रोत की उत्तम व्यवस्था की होगी और खूबसूरती भी प्रदान की थी जिसका जल आज ग्रामीण इस्तेमाल कर रहे है।
