रायसेन।हाल ही में, एक छोटे बच्चे में अन्किलोग्लॉसिया (tongue tie) की समस्या का सफलतापूर्वक शल्यक्रिया द्वारा जिला चिकित्सालय का डेंटल विभाग के प्रभारी डॉक्टर हर्ष विभोर भारती, डॉक्टर मोतुशी, डॉक्टर वासी ,डॉक्टर कपिल, डॉक्टर कंचन , डॉक्टर जरयाब, डॉक्टर ज्योति एवं सपोर्ट स्टाफ द्वारा उपचार किया गया।
जीभ-टाई तब होती है जब बच्चे की जीभ उतनी अच्छी तरह से नहीं हिल पाती जितनी उसे हिलनी चाहिए क्योंकि ऊतक की एक तह जीभ के निचले हिस्से को उसके मुंह के तल से जोड़ती है। ऊतक की यह तह, जिसे लिंगुअल फ्रेनुलम कहा जाता है, सभी बच्चों में मौजूद होती है और आमतौर पर हानिरहित होती है। लेकिन कभी-कभी, लिंगुअल फ्रेनुलम जो बहुत तंग या छोटा होता है, वह बच्चे की जीभ की हरकत और कार्य को प्रतिबंधित कर सकता है।
अन्किलोग्लॉसिया के शल्यक्रिया में जीभ की फ्रेनम को काटा जाता है, जिससे बच्चे को बेहतर गतिशीलता मिलती है। इस प्रक्रिया को ‘फ्रेनोटॉमी’ कहा जाता है। यह सरल और सुरक्षित है, और इसके बाद अधिकांश बच्चे तेजी से स्वस्थ होते हैं।
हालांकि, इस समस्या का सही निदान और उपचार आवश्यक है। माता-पिता को सावधानी बरतनी चाहिए और किसी भी संदेह की स्थिति में विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। सामाजिक जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है ताकि लोग इस स्थिति को समझ सकें और समय पर उचित कदम उठा सकें।
हमारे चिकित्सा पेशेवरों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्हें चाहिए कि वे माता-पिता को सही जानकारी दें और शल्यक्रिया के बाद की देखभाल के बारे में जागरूक करें।
यह निश्चित रूप से एक सकारात्मक कदम है कि हम इस प्रकार की समस्याओं को पहचानकर उनके समाधान की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। हमें उम्मीद है कि इस उपचार से प्रभावित बच्चों का जीवन सरल और खुशहाल हो