सोहागपुर नर्मदापुरम।कतिया समाज के सिरमौर भगवान शंकर के परम प्रिय भक्त संत शिरोमणि श्रीश्री 1008 भूरा भगत महाराज जी के अवतरण दिवस पर सोहागपुर कतिया समाज द्वारा श्री पहलाद जी गढ़वाल के निजी निवास पर कतिया समाज सेवा समिति के द्वारा जयंती समारोह का आयोजन किया भूरा भगत महाराज जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर पूजन अर्चना की गई। समाजिक बंधुओं ने भूरा भगत जी की आरती उतारी और प्रसाद वितरण किया गया तत्पश्चात स्थानी गुरु नानक स्कूल स्थित हनुमान मंदिर परिसर में फलदार पौधे रोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। सामाजिक एकता और भाईचारे का परिचय दिया आप सभी के द्वारा बताया गया कि भारत में हर समाज में कई सिद्ध और प्रसिद्ध संत हुए हैं उन्हीं में से एक है संत भूरा भगत महाराज। महान संत भूरा भगत महाराज की जयंती वैशाख शुक्ल पक्ष की नवमी को मनाई जाती है।माना जाता है कि 16वीं सदी में भक्तिकालीन युग में संत भूरा भगत महाराज का जन्म नागवंशी परिवार में हुआ। उन्हें कतिया समाज का कुलदेव माना जाता है। संत भूरा भगत बचपन से ही भक्त प्रवृत्ति के थे। बचपन से ही प्रभु भक्ति में लीन रहने वाले संत भूरा महाराज एक बार ध्यान में ऐसे मगन हुए की दूसरे दिन उनकी समाधि टूटी। उस दिन के बाद वे घरबार त्यागकर प्रभु भक्ति के लिए पहाड़ पर तप करने हेतु चले गए। बाद में तपस्या करके उन्होंने भोलेनाथ को प्रसन्न कर लिया और भोलेनाथ ने उन्हें आशीर्वाद के साथ ही वरदान भी दिया।

उन्होंने धवला गिरी पर्वत पर तप करके भोलेनाथ को प्रसन्न किया। यह स्थान अब परम पवित्र माना जाता है। यह उनकी साधना स्थली अब तीर्थ स्थल के समान है। संत की प्रतिमा एक शिला के रूप में यहां विद्यमान है। छिंदवाड़ा जिले के नांदिया ग्राम के पहले देनवा नदी के पास यह प्रतिमा विराजमान है।शिवजी से उन्होंने वरदान मांगा कि मैं आपके ही चरणों में रहूं और यहां आने वाले को आपका मार्ग बता सकूं। भूरा भगत महाज एक शिला के रूप में वहां मौजूद हैं।
जिसमें समाज के वरिष्ठ एस.आर.अरसे, प्रहलाद गढ़वाल जी ,सुनील कुमार गढ़वाल,नितिन कुमार सूर्यवंशी,भूपेंद्र सूर्यवंशी, नारायण लंजेश एवं कतिया समाज युवा संगठन के युवा साथी शुभम सयालवार,ऋषभ गढ़वाल, विवेक आम्रवंशी , मयूर गढ़वाल ,राजा अरसे, करण नागवंशी पंकज आम्रवंशी ,प्रधुम नागवंशी,प्रियांशु धरसे ,संस्कार गढ़वाल ,बसंत सूर्यवंशी उपस्थित रहे।