मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
सांची विकासखंड में हलाली डैम तक जाने के लिए बेरखेड़ी चौराहा से लेकर हलाली डैम तक कुछ वर्ष पहले रोड का निर्माण हुआ था। खोआ गांव निकलते ही जैसे घाटी चढ़ते हैं इस घाटी पर टूटी फूटी रेलिंग हादसों को दावत दे रही है। बेरखेड़ी चौराहा से कई राहगीर हलाली डैम होते हुए सलूज , खामखेड़ा, पीपल खेड़ी, बेरसिया, सहित लगभग आधा दर्जन गांव के ग्रामीण इसी मार्ग से होते अपने घर तक पहुंचाते हैं। सरकारी छुट्टी होने पर सैलानी छुट्टी मनाने के लिए हलाली डैम पहुंचते हैं। बारिश के समय में हलाली डैम का छारछरा चालू होता है तो हजारों की तादात में सैलानी इसी रोड से होते हुए पहुंचते हैं। इतना व्यस्ततम रोड होने के बाद भी अधिकारी रेलिंग सही कराने के लिए गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं। जिस तरफ लोहे की रेलिंग टूटी है उस तरफ 50 फीट गहरी खाई है अगर कोई वाहन चालक इस खाई में गिर गया तो उसका बचना नामांकित है। लोगों ने रेलिंग सही कराने की मांग की है। बेरखेड़ी चौराहा से लेकर हलाली डैम तक मार्ग बनाने के दौरान लोहे की रेलिंग लगाई गई थी ताकि पैदल चलने वाले लोगों, वाहन चलाने वाले रहागीरो को कोई खतरा न हो। कुछ दिन बाद ही घाटी पर लगाई गई लोहे की रेलिंग के नट खुल गए जिससे रेलिंग नीचे गिर गई। कई महीनो से लोहे की रेलिंग उसी जगह नीचे पड़ी हुई है। इससे लोगों को खतरा बना हुआ है। पवन प्रजापति, जितेंद्र मीणा, सुरेंद्र नायक, मनमोहन साहू आदि ग्रामीणों का कहना है कि ज्यादा खतरा घाटी उतरते समय रहता है। जिस तरफ लोहे की रेलिंग नीचे पड़ी है उसके पास ही 50 फीट नीचे गहरी खाई है। रात के अंधेर में घाटी उतरते समय सबसे अधिक खतरा बना रहता है। जल्द की टूटी रेलिंग को ठीक कराया जाए.
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