-अतिथि विद्वानों का आरोप,2017 से ज्यादा विवादित इस भर्ती को निरस्त करे सरकार
डॉ.अनिल जैन भोपाल
सूबे के सरकारी महाविद्यालयों में होने वाली सहायक प्राध्यापक भर्ती परीक्षा द्वतीय चरण की परीक्षा को भी आयोग ने आगामी आदेश तक स्थगित कर दिया है।जारी आदेश के अनुसार लोक सभा निर्वाचन के आधार पर स्थगित किया गया है।ये परीक्षा निम्नलिखित विषयों भौतिक विज्ञान,रसायन विज्ञान,अर्थशास्त्र,भूगोल,राजनीति शास्त्र,समाजशास्त्र,प्राणीशास्त्र, की दिनांक 2/6/2024 को होनी थी जो कि अब स्थगित हो चुकी है।इधर अतिथि विद्वान महासंघ ने कड़ी आपत्ति जताते हुए बयान जारी किया है।महासंघ के अध्यक्ष डॉ देवराज सिंह ने कहा कि psc किसी भी सूरत में अतिथि विद्वानों के हित मे नहीं है, प्रदेश के मूल निवासी अतिथि विद्वानों के नियमितीकरण भविष्य सुरक्षित के तरफ़ सरकार ध्यान दे।psc में दूसरे राज्यों के अभ्यर्थियों की भरमार हो जाती है जो बेहद गंभीर मामला है।आगे डॉ सिंह ने बताया कि ये psc 2017 की psc से भी ज्यादा विवादित हो चुकी है।
अतिथि विद्वानों के स्थानांतरण में भी लगा ब्रेक
इधर चुनाव आचार संहिता के ठीक पहले आयुक्त कार्यालय भोपाल से पत्र जारी किया गया था जिसमें कैलेंडर के आधार पर कार्यरत अतिथि विद्वानों का स्थानांतरण किया जाएगा स्वेक्षानुसार लेकिन आचार संहिता के बाद उस आदेश को निरस्त कर दिया गया।कारण लोकसभा चुनाव बताया जा रहा है।अब आचार संहिता के बाद अतिथि विद्वानों का ट्रांसफर किया जा सकता है।महिला अतिथि विद्वानों को लाभ मिल सकता था पर हो नही पाया।

पीएससी में देरी के चलते अतिथि विद्वानों पर दांव खेल सकती है सरकार
सहायक प्राध्यापक भर्ती प्रक्रिया लगातार विवादित होती जा रही है,कई मामले कोर्ट में उलझे हुए हैं और सरकार को कोई रास्ता नहीं सूझ रहा है।अब एक रास्ता बनता दिख रहा है जिसकी सुगबुगाहट उस समय तेज़ हुई जब मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने अपने एक बयान में कहा था कि अतिथि विद्वानों को उनके मेहनत लगन परिश्रम का फल आज तक नही मिला लेकिन अब नई सरकार समायोजन के लिए प्रयास कर रही है।तो पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान,उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल,उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने भी अतिथि विद्वानों को उच्च शिक्षा का रीढ़ कहा है।अगर सरकार विद्वानों को स्थाई करती है तो ये भाजपा सरकार का ऐतिहासिक निर्णय कहा जाएगा।
इनका कहना हे-
अतिथि विद्वानों की समस्या का सिर्फ एक ही हल है नियमितीकरण,स्थाई,कैडर।अगर सरकार ये करती है तो अपने आप सब निराकरण हो जाएगा।सरकार के दृढ़इच्छाशक्ति पर है संवेदनसिलता पर है।psc भर्ती को तो पूरा प्रदेश जानता है किसी से छुपा नहीं है किसके लिए की जाती है।सरकार न्याय करे विद्वानों के साथ।ये कटु सत्य है कि उच्च शिक्षा विभाग को सिर्फ अतिथि विद्वान ही संभाल रहे हैं और उन्ही का शोषण,और सौतेला व्योहार किया जाता है।
–डॉ आशीष पांडेय,अतिथि विद्वान महासंघ
