आवारा मवेशियों से किसानों की फसलों को बचाना बना चुनौती,बेकार साबित हो रहीं सरकार की गौ शालाएं
शिवलाल यादव रायसेन
जिले में आवारा मवेशी किसानों के लिए सिर दर्द बने हुए हैं। जिले के शहरी क्षेत्र हों या ग्रामीण सभी क्षेत्रों में आवारा जानवर गाय सांड रोज किसानों की रबी सीजन की फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। इससे किसानों का काफी नुकसान हो रहा है। हालांकि किसान मवेशियों से सुरक्षा के लिए फसलों की रखवाली भी करते हैं। साथ ही खेतों के चारों ओर तार फेंसिंग बारी भी लगाई।लेकिन इसके बावजूद भी झुंड बनाकर मवेशी खेत में घुस कर फसलों को चट कर जाते हैं। ऐसे में आवारा जानवरों की समस्या का समाधान नहीं हो रहा है।
जिले में किसान जंगली के साथ- साथ पालतू जानवरों से भी काफी परेशान हैं। जिले में हर साल ये आवारा मवेशी हजारों हेक्टेयर जमीन पर लगी फसल को बर्बाद कर रहे हैं। ऐसे में यहां के अधिकांश किसानों ने पहले से फसलों की सुरक्षा के लिए खेतों की तारबंदी की गई है। इसके साथ ही बागड़ भी लगाई गई, लेकिन इसके बाद भी जानवरों के झुंड के लिए ये नाकाफी हैं।

किसान परषोत्तम दांगी, चैन सिंह मीणा, श्रीकृष्ण मीणा, कालूराम विश्वकर्मा का कहना है कि जानवरों के झुंड से खेतों में खड़ी गेंहूं चना सहित मटर, टमाटर, मसूर आदि की फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इससे किसान चिंतित हैं। जिले के वन क्षेत्र से लगे गांवों में वन्य प्राणी लंबे समय से फसलों को क्षति पहुंचा रहे हैं।यह पशु फसल को रौंद रहें हैं।खनपुरा गांव के किसान रामभरोसी कुशवाहा प्यारे लाल ने बताया कि जानवर मटर, टमाटर ,मूली व अन्य फसलों को भी बुरी तरह प्रभावित कर रहे हैं। 20-25 की संख्या में रात में विचरण करने वाले जंगली जानवर जिस खेत में घुसते हैं, वहां की फसल बर्बाद हो जाती हैं।इससे किसान अपनी फसलों को बचाने के लिए जतन करते हैं व पूरी रात उन्हें जानवरों को भगाने के लिए खेतों के आसपास घूमते फिरते बितानी पड़ती है।