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स्कूल के अंदर कही डली दारू की बोतल तो कहीं बैठे आवारा पशु

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-स्कूल प्रधानअध्यापक नशे की हालत में पहुचते हैं स्कूल
 अभिषेक असाटी बक्सवाहा

विकासखंड के अंतर्गत आने वाले बहुत से ऐसे स्कूल है जहां प्रधानअध्यापक की लापरवाही से बच्चों का भविष्य अंधकार में डुबता चला जा रहा है। ताजा मामला विकासखंड के अंतर्गत आने वाले एकीकृत शासकीय माध्यमिक शाला बिछोन का है जहां पदस्थ प्रधान अध्यापक उमाकांत गुप्ता नशे की हालत में स्कूल पहुंचते हैं ग्राम के निवासी प्रदीप यादव, कमलेश आदिवासी, श्रीराम यादव, रामकृष्ण यादव, बड़ेभाई आदिवासी ने बताया है कि प्रधान अध्यापक उमाकांत गुप्ता स्कूल में कभी कबार ही आते हैं और वह नशे की हालत में आकर पंजी रजिस्टर पर हस्ताक्षर बनाकर अपने घर चले जाते हैं या अपने ऑफिस में जाकर आराम फरमाते हैं जिस कारण से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है जब बच्चों के अभिभावक प्रधानाध्यापक से बच्चों की पढ़ाई के बारे में कहते तो प्रधान अध्यापक अभिभावकों को डांट फटकार कर बाहर जाने के लिए बोल देते सोचने वाली बात है जब स्कूल में जब प्रधान अध्यापक ही स्कूल नहीं जाते तो शिक्षक कैसे स्कूल पहुंचेंगे और कैसे बच्चों का भविष्य उज्जवल होगा।


पानी की तरह मिलती है सब्जी एवं खिचड़ी
स्कूल के बच्चों ने बताया कि हम निरंतर स्कूल जाते हैं लेकिन स्कूल के बाहर ताला लगा होने के कारण हम कुछ देर इंतजार करने के बाद वापस घर आ जाते हैं स्कूल के गेट का ताला कभी कबार ही खुला मिलता है जिस कारण से हम लोगों की पढ़ाई व्यवस्था पूर्ण रूप से ठप है हम सभी बच्चों को मध्यान भोजन समय से नहीं दिया जाता हम लोगों को मध्यान भोजन में पतली दाल और अधपके चावल दिए जाते हैं रोटी कभी कभी देखने को मिलती है बैठने के लिए हम लोगों के लिए कोई व्यवस्था नहीं है हम लोगों को जमीन पर बैठकर ही मध्यान भोजन करना पड़ता है जहां हम बच्चों को मध्यान भोजन के लिए बिठाया जाता है वहीं मुक पशु आकर हम लोगों की मध्यान भोजन पर धावा बोल देते हैं यहां तक की हमारी क्लासों में भी कुत्ते एवं गाय आकर बैठती हैं हम बच्चों को ही क्लास में साफ सफाई करनी पड़ती है मध्यान भोजन करने के बाद हम सभी बच्चों को बर्तन भी धोने पड़ते हैं।


स्कूल परिसर में गंदगी अंवार
देखा जाए तो प्राथमिक शासकीय माध्यमिक शाला बिछोन के स्कूल परिसर में काफी गंदगी एवं आवारा पशुओं का गोबर देखा जा सकता है स्कूल के अंदर क्लासों में ना तो कभी झाड़ू लगाई जाती है ना ही उसे कचरे को उठाकर कहीं व्यवस्थित जगह डाला जाता है बच्चों को अपने बैठने के लिए स्वयं झाड़ू लगानी पड़ रही है मध्यान भोजन बनने वाली स्थान पर आवारा पशुओं का जमावड़ा देखा जा सकता है।


समय से पहले होती छुट्टी
बच्चों ने बताया कि स्कूल में पढ़ाई नहीं कराई जा रही है और स्कूल अपनी मनमर्जी से खुल जाता है एवं बंद कर दिया जाता है कभी-कभी तो स्कूल की छुट्टी 2:30 बजे ही कर दी जाती है हम बच्चों का कोर्स अभी तक अधूरा पड़ा हुआ है।
इनका कहना है
इस संबंध में मुझे आपके द्वारा जानकारी प्राप्त हुई है और अगर इस तरह का मामला बिछोन स्कूल में पाया जाता है तो निश्चित तौर पर ही अनुशासनिक कार्यवाही की जाएगी।

पवन राय ब्लॉक शिक्षा अधिकारी

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