अवैध कॉलोनी की लिस्ट से 50 कॉलोनियां लापता:हैरानी यह कि 2016 के पहले सूची में ये कॉलोनियां भी थीं और इनमें 2500 मकान भी बने हैं
शिवलाल यादव रायसेन
डेढ़ साल से जारी अवैध कॉलोनियों की छंटाई के बीच एक गड़बड़ी सामने आई है।
डेढ़ साल से जारी अवैध कॉलोनियों की छंटाई के बीच एक गड़बड़ी सामने आई है।ररायसेन में 56अवैध कॉलोनियां ‘लापता’ हो गई हैं। 325 अवैध कॉलोनियों की लिस्ट नगर पालिका परिषद नगर परिषद ने 1.5 साल पहले तैयार की थी। उनमें से ये 56 नाम चीफ सिटी प्लानर ने ये कहकर हटा दिए हैं कि ये कॉलोनियां हैं ही नहीं और किसी ने हमें आकर इनके बारे में बताया भी नहीं। ये वो कॉलोनी हैं जो सीलिंग की जमीन पर हैं, या फिर नाले-सड़क और ग्रीन बेल्ट पर कब्जा कर के बनाई गई हैं।
अगर इन जगहों पर अवैध कॉलोनी बन भी जाती है तो सरकार इसको नियमित नहीं कर सकती। इसलिए इन कब्जेधारी कॉलोनियों को लिस्ट से ही गायब कर दिया है। और इन काॅलोनियों में प्लॉट-मकान की खरीदी-बिक्री और निर्माण को सरकारी नियंत्रण से बाहर कर दिया है। ऐसे में सरकारी जमीन को काॅलोनी के नाम पर बेचना आसान हो जाएगा। इन 50-54 कॉलोनियों में 50 हजार मकान हैं और 2.5 लाख आबादी रहती है।

नाले की जमीन बेची, हाईटेंशन लाइन के नीचे प्लॉट काटे और सड़क-सीलिंग की जमीन पर भी घर बनाए…..
रायसेन शहर के पॉश कालोनियों के समीप बेतरतीब तरीके से 500 मकान बने हुए हैं। यहां कालोनियों में पानी भर जाता है। इसकेे निराकरण के लिए 15 करोड़ रुपए का नाला मंजूर तो हुआ।लेकिन बन नहीं पा रहा है।
कुछ स्थानीय जनप्रतिनिधिबताते हैं कि जहां भी नाला बनना शुरू होता है कोई न कोई आकर कह जाता है कि ये उसका प्लॉट है। यानी नाले की सरकारी जमीन भी बेच दी गई है। इसी इलाके में हाईटेंशन लाइन के ठीक नीचे भी प्लॉट काटे हैं। यहां एक बड़ी जमीन सीलिंग की है। सीलिंग की जमीन को बेचने पर रोक है। बावजूद इसके उस जमीन पर प्लॉट काट दिए हैं।
ऐसे होगी गड़बड़ी… सरकारी भूमि को कॉलोनी के नाम पर बेचना आसान हो जाएगा।
सॉफ्टवेयर बदला तो लेआउट ही गायब…..
नगर पालिका परिषद बिल्डिंग का परमिशन सॉफ्टवेयर बदल गया है। नगर पालिका परिषद का तर्क है कि 2 साल पहले बदले गए सॉफ्टवेयर का डेटा नए में नहीं आया तो कई कॉलोनियों के लेआउट रिकॉर्ड पर नहीं हैं। जबकि पहले इन काॅलोनियों को अवैध की सूची में शामिल किया था। नगरीय निकाय ने इस बार स्टाफ से सर्वे कराने की बजाय लोगों से दावे-आपत्ति बुलाए और जिन कॉलोनियों के लोगों ने जानकारी नहीं दी वो सूची से गायब कर दी गईं।