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प्रौढ़ शिक्षा विभाग से स्कूल शिक्षा विभाग में आए 30 से अधिक अधिकारियों की पदोन्नति तत्काल रद्द की जाए : मुरारी लाल सोनी 

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भोपाल। मध्य प्रदेश में 1994 में प्रौढ़ शिक्षा विभाग से स्कूल शिक्षा विभाग में लाए गए 30 से अधिक अधिकारियों की विभागीय जांच वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम कराना चाहिए क्योंकि यही आयातित अधिकारी अब समूचे शिक्षा प्रशासन के शिखर पर आसीन हो गए हैं और सेवा निवृत्ति के बाद भी स्कूल शिक्षा विभाग के विभिन्न राज्य स्तरीय कार्यालयों में सलाहकार के रूप में आउट सोर्सिंग के माध्यम से पदस्थ किए जा रहे हैं. वरिष्ठ कर्मचारी नेता मुरारी लाल सोनी ने सरकार से मांग की हे।

वरिष्ठ कर्मचारी नेता  ने बताया कि प्रदेश के यह अधिकारी राज्य शिक्षा सेवा 2013 के माध्यम से 10 साल में ही चार – पांच पदों पर पदोन्नत होकर सहायक संचालक से अपर संचालक और संचालक के पद पद पर आ गए हैं जबकि राज्य शिक्षा सेवा के अंतर्गत ही स्वीकृत 3000 से अधिक क्षेत्रीय शिक्षा अधिकारी (A E O ) के पदों पर अभी तक एक भी व्यक्ति को चयनित नहीं किया गया है . राज्य शिक्षा सेवा के नियमानुसार AEO के चयन के साथ ही DPC और BRC कार्यालय बंद किए जाने थे. AEO का चयन न होने से करीब 10000 से अधिक शिक्षक प्रतिनियुक्ति पर कार्य कर रहे हैं और दुहरे शिक्षा कार्यालय संचालित हो रहे हैं. राज्य शिक्षा सेवा में ही सहायक संचालक के 400 से अधिक पद लोक सेवा आयोग ( PSC ) के माध्यम से भरे जाने की नीति बनाई गई है जिस कारण यह बिना किसी शिक्षण- प्रशिक्षण और शैक्षिक अनुभव के सीधी भर्ती से चुन लिए गए हैं .

मुरारी सोनी ने कहा कि स्कूल शिक्षा प्रशासन में कार्यरत ऐसे अधिकारियों की निहित स्वार्थी भावना से प्रदेश में स्कूल अपेक्षित सफ़लता प्राप्त नहीं कर पाए हैं.

उन्होंने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री श्री दिग्विजय सिंह ने अपने शासनकाल में प्रौढ़ शिक्षा विभाग से स्कूल शिक्षा विभाग में ऐसे अधिकारियों की सेवाएं स्वीकार कर ली थी जिन्होंने न तो किसी विद्यालय में कभी बच्चों को पढ़ाया और न ही शिक्षा – प्रशिक्षण की कोई डिग्री ही प्राप्त की. सोनी के अनुसार यह खोज का विषय है कि बिना किसी शैक्षिक अनुभव और शिक्षण- प्रशिक्षण की डिग्री के बगैर यह अधिकारी स्कूल शिक्षा के लिए योग्य कैसे मान लिए गए . अब यही अधिकारी बिना किसी योग्यता और पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण किए स्कूल शिक्षा विभाग में विभिन्न वरिष्ठ पदों पर पदोन्नत भी कर दिए गए हैं जबकि इनकी योग्यता और पात्रता स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों के लिए शासन द्वारा निर्धारित योग्यता के अनुसार नहीं है .

वरिष्ठ कर्मचारी नेता ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि इनकी अवैध पदोन्नति तत्काल रद्द करते हुए इनके सम्पूर्ण सेवा के दौरान लिए गए निर्णयों की जांच की जानी चाहिए और इस दौरान इनके द्वारा अर्जित सम्पत्ति की भी खुली जांच की जानी चाहिए.

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