अनंत चतुर्दशी पर नगर के 16 मंदिरों से निकलीं श्रीजी की शोभायात्राएं, 1000 से अधिक श्रद्धालुओं ने रखा उपवास
सागर। जैन धर्मावलंबियों के आत्म आराधना के पर्वराज दशलक्षण पर्व का शुक्रवार, 25 सितंबर को विधि विधान एवं धार्मिक आयोजनों के साथ समापन हुआ। दस दिवसीय इस पर्व के दौरान श्रावकों ने संयम, तप, आत्मचिंतन और साधना के माध्यम से दस धर्मों की आराधना की। सागर नगर में चार मुनि संघों के सानिध्य में दशलक्षण पर्व मनाया गया।

अनंत चतुर्दशी के अवसर पर नगर के 16 जैन मंदिरों से श्रीजी की भव्य पालकी एवं शोभायात्राएं निकाली गईं। शोभायात्राओं में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
अनंत चतुर्दशी पर 1000 से अधिक श्रद्धालुओं ने उपवास रखा, जबकि हजारों श्रद्धालुओं ने एक समय भोजन करने का संकल्प लेकर तप-साधना की। महिलाओं की भागीदारी ज्यादा रही

मुकेश जैन ढाना ने बताया कि दशलक्षण पर्व के दौरान जैन धर्मावलंबियों ने नियम, संयम और श्रद्धा के साथ दस धर्मों की आराधना की। पर्व के अंतिम दिन जैन मंदिरों में भगवान का पूजन, अभिषेक एवं शांतिधारा की गई। शाम को मंदिरों में भव्य आरती हुई, जिसमें बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

दशलक्षण पर्व के दसवें दिन उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की आराधना की गई। इसी अवसर पर जैन धर्म के 12वें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य के मोक्ष कल्याणक पर्व और अनंत चतुर्दशी का धार्मिक आयोजन भी विधिविधान से संपन्न हुआ।
जिन जिनालयों से श्रीजी की पालकी यात्रा नहीं निकाली गई, वहां घटयात्रा निकली। इसके बाद भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा संपन्न हुई। विभिन्न मंदिरों में बाहर से आए विद्वानों का मंदिर समितियों द्वारा सम्मान भी किया गया।

क्षमावाणी पर्व 26 सितंबर को मनाया जाएगा। हालांकि अनंत चतुर्दशी से ही श्रद्धालुओं के बीच एक-दूसरे से अपनी भूलों के लिए क्षमा मांगने का सिलसिला शुरू हो गया है। दशलक्षण पर्व के समापन पर श्रद्धालुओं ने तप, संयम, आत्मचिंतन और धार्मिक साधना के माध्यम से पर्व की आध्यात्मिक भावना को आत्मसात किया।
शाम को सभी मंदिरों में पदाधिकारी ने साल भर का लेखा-जोखा आदि देखा और चर्चा की। रामपुरा में श्री बांसपुज्य भगवान का महामस्तका अभिषेक हुआ और कटरा स्थित पारसनाथ भगवान में शांति धारा मूलनायक भगवान की प्रतिमा पर हुई

26 सितंबर को भाग्योदय तीर्थ सागर से निर्यापक मुनि श्री अभय सागर महाराज के ससंघ सानिध्य में सुबह 7 बजे से श्री जी की शोभायात्रा प्रारंभ होगी आसपास की कॉलोनी से होकर वापस भाग्योदय तीर्थ पहुंचेगी जहां पर मुनि संघ के मंगल प्रवचन होंगे। 26 सितंबर को ही सुभाष नगर जैन मंदिर से श्री जी की शोभायात्रा निकलेगी